Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 4

Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 4 – स्वागत है आपका हमारे  अकबर बीरबल स्टोरीज इन हिंदी ब्लॉक के  14वें संस्करण में जिसमें हम एक और ऐसे कहानी के बारे में बताने जा रहे हैं

जिसमें बीरबल ने एक ऐसी मनोविज्ञानी  प्रयोग के माध्यम से एक ऐसे झूठे इंसान का सच शहंशाह अकबर के सामने लेकर  आय जिसने अपने परम मित्र को धोखा दिया

और इस कहानी के माध्यम से हम लोगों तक ही सीख पहुंचाने जाते हैं  कि कभी भी अपने दोस्त को धोखा नहीं देना चाहिए क्योंकि जब आपके जीवन में अपने लोग धोखा दे जाते हैं

तभी दोस्त एक ऐसा जरिया बनता है जिसकी मदद से आप मुसीबत के बड़े पहाड़ को भी जोड़ सकते हैं दोस्त एक ऐसा मुसाफिर है जो जिंदगी के रेगिस्तान में  आपके लिए ऊंट बनता है और आपके जिंदगी में आए मुसीबत को दूर करने में आपकी पूरी पूरी मदद करता है

 लेकिन इस कहानी में जो दो दोस्त की बात हम कहने जा रहे हैं जो दोनों ही पहले गरीब हुआ करते थे लेकिन  एक दोस्त अपने चालाकी और लोगों को धोखा देकर अमीर बन गया था

और दूसरा दोस्त  सत्य की राह पर चलता था जो किसी का  बुरा नहीं चाहता था और जिस वजह से दोनों अलग हो गए थे लेकिन दोनों में दोस्ती बरकरार थी लेकिन जो दोस्त अमीर हो गया था और उसकी नियत दिन प्रतिदिन खराब होती जा रही थी और वह बहुत ही ज्यादा लालची इंसान बन गया था 

हम इस कहानी में देखेंगे किस तरह लालची दोस्त की सच्चाई राजा बीरबल ने अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए सभी के सामने प्रस्तुत किया और समाज में एक ऐसा संदेश पारित किया जिसमें दोस्त की हमेशा सच्चे मन से मदद करनी चाहिए और उन्हें धोखा नहीं देना चाहिए ऐसा एक पाठ सभी को ग्रहण करवाया

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akbar birbal stories in hindi for class 4

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एक बार की बात है जब अजय और विजय नाम के दो छोटे बालक एक ऋषि के आश्रम में विद्या ग्रहण करने के लिए गए थे अजय विजय दोनों ही ब्राह्मण परिवार की बच्चे थे

दोनों ही आचार्य से शिक्षा ग्रहण कर रहे थे और शिक्षा ग्रहण करने के दौरान दोनों के व्यक्तित्व में परिवर्तन आने लगा इसमें अजय एक ऐसा बालक था जो हमेशा सत्य की राह पर चलता था

किसी का भी बुरा नहीं चाहता था और हमेशा जरूरतमंद लोगों की मदद करता था किसी भी बीमार इंसान को कभी भी तड़पते हुए नहीं देख सकता था हमेशा ऐसे लोगों की मदद करता था

जो बहुत ही ज्यादा तकलीफ में थे और इसी वजह से  आचार्य अजय को बहुत ही ज्यादा प्रेम करते थे दूसरी ओर विजय एक ऐसा व्यक्तित्व वाला इंसान था जो सिर्फ अपने खुद के बारे में सोचता था

उसके लिए हर एक  वस्तु जो इस संसार में है वह सिर्फ उसी के लिए बनी हो वह हमेशा हर एक वस्तुओं में  लाभ और हानि के आंखों से देखता था विजय ज्यादा से ज्यादा ज्ञान हासिल करने में मानता था

उसका कहना था कि वह अगर छोटे से उम्र में ही ज्ञान प्राप्त करना शुरू कर दें तो  जब वह एक युवक हो जाएगा तो समाज में उसकी बहुत ही ज्यादा इज्जत होगी और वह हर एक इंसान को अपने नीचे काम करवा पाएगा

समय बीतता गया और कुछ ऐसा ही हुआ मुझे एक बहुत ही ज्यादा प्रभावशाली इंसान बन चुका था वह अपने गांव में एक सेठ की जिंदगी बिता रहा था  वह लोगों को ब्याज पर पैसा देता था

और लोग उससे पैसे लेकर अपनी जरूरतमंद चीजों को खरीदते और काम में लगा दे और इसी तरह वह पूरे गांव के सभी लोगों  के साथ लेन-देन करता था जिसकी वजह से उसकी गांव में बहुत ही ज्यादा पहचान हो गई थी

और वह सभी के नजरों में एक ऐसा इंसान बन गया था जो सिर्फ पैसे कोई पहचानता  है और सभी उसे  सेठ कहकर पुकारते थे पैसों की ज्यादा भूख की वजह से वह दिन प्रतिदिन लालची बनता जा रहा था और लोगों  से धोखे से दुगना  ब्याज वसूल करने लगा था

आचार्य के आश्रम से शिक्षा ग्रहण करने के बाद दोनों ही दोस्त एक दूसरे से ज्यादा बात नहीं करते थे लेकिन दोनों में प्यार और दोस्ती बरकरार थी

धोखेबाज दोस्त भाग 2

अजय एक ऐसा इंसान था जो अपने आचार्य की तरह एक आश्रम में साधारण जीवन व्यतीत करता था और उसने गरीब लोगों के बच्चों को ज्ञान प्रदान करना शुरू किया था

जहां बहुत ही ज्यादा जरूरतमंद बच्चे जिन्हें ज्ञान की बहुत ही ज्यादा जरूरत है और अपने जीवन में कुछ हासिल करने की  उद्देश्य से तथा सफल होने के अभिलाषा को लेकर अजय के पास आते थे

अजय बिना किसी स्वार्थ को देखते हुए सभी बच्चों  को पढ़ाता था और उनसे किसी भी प्रकार का  मुद्रा नहीं लेता था जिससे गांव में अजय के प्रति सभी के अंदर सम्मान और प्रेम था सभी  उसे बहुत ही ज्यादा मानते थे

 अजय और विजय दोनों के व्यक्तित्व में रात और दिन का फर्क था जहां पर अजय सभी के बारे में अच्छा सोचता सभी   की मदद करता दूसरी और विजय सिर्फ अपने बारे में सोचता था

इसके अलावा वह गांव के हर एक इंसान के पास से  धोखे से  दुगना ब्याज वसूल करता था इसके बारे में पूरे गांव को पता था लेकिन अजय विजय को बहुत ही ज्यादा प्रेम करता था जिस वजह से हमेशा वह गांव के लोगों को समझाता रहता था कि विजय एक अच्छा इंसान है बस वह रास्ता भटक गया है

एक बार की बात है जब अजय अपने  मेहनत द्वारा कमाए पैसों को एक पोटली में बांधकर विजय के घर गया और विजय से कहने लगा कि मैं  6 महीने की तीर्थ के लिए राज्य से बाहर जा रहा हूं

क्या तुम मेरी इस जमा पूंजी को अपने पास कुछ दिनों के लिए रख सकते हो मैं तीर्थ से  आने के बाद तुमसे मेरी संपूर्ण पूंजी वापस लेकर जाऊंगा विजय ने अजय द्वारा दिए पैसों की पोटली को अपने पास रखा और कहा कि मित्र तुम आराम से निश्चिंत होकर जाओ मैं तुम्हारे लौटने तक इंतजार करूंगा

धोखेबाज दोस्त भाग 3

 

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