Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 3

Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 3 – स्वागत है आपका हमारे एक और संस्करण में इस संस्करण के माध्यम से हम लोगों को एक ऐसी विज्ञान से अवगत करवाने जा रहे  है जिसकी वजह से बीरबल एक ऐसे लाचार इंसान के काम आए जो शहंशाह अकबर द्वारा अपने राज्यसभा से तिरस्कार करके निकाला गया

 शहंशाह अकबर ने  लाचार इंसान के ऊपर एक एस्से मनोवैज्ञानिक दबाव बनाए जिससे वह लाचार इंसान अपने हक को लिए बिना ही शहंशाह अकबर के दरबार से चला गया

लेकिन बीरबल की चतुराई की वजह से लाचार इंसान को फिर से शहंशाह अकबर ने इसके साथ बुलाया और उसके द्वारा किए मेहनत का फल उसे इनाम में दिया

 हम इस कहानी के माध्यम से  यह सीखेंगे कि काम कितना भी कठिन हो  और अगर आलस को छोड़कर उसे मेहनत और लगन से किया जाए तो कोई भी  कठिन काम आसानी से पूरा हो सकता है

उस काम का फल हमें प्राप्त होने से कोई नहीं रोक सकता और  इस कहानी के माध्यम से हम कुछ ऐसे ही घटना को आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं जिसमें परिश्रम बुद्धिमता और एक इंसान के लग्न की वजह से उसे अपने हक का इनाम  बादशाह से प्राप्त हुआ

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Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 3

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एक बार की बात है जब शहंशाह अकबर अपनी परम मित्र राजा बीरबल के साथ ठंड के दिनों में सुबह उठकर बगीचे में टहल रहे थे तभी उन्होंने देखा कि उनके बगीचे में जो तालाब है उसका पानी  बहुत ही ठंडा है

और ऐसा लग रहा है जैसे कि वह पानी जमने लगा है तभी शहंशाह अकबर ने कहा कि इस ठंडी के मौसम में क्या कोई ऐसा भी इंसान है जो काम कर सकता है

 ज्यादातर लोग ठंडी के मौसम में  अपने सभी प्रकार के कामों को जल्दी खत्म करके अपने घर लौट जाते हैं ताकि उन्हें ठंडी का एहसास कम और उनका शरीर गरम रहे

लेकिन राजा बीरबल के अनुसार कुछ ऐसे भी लोग हैं जो बहुत ही ज्यादा लाचार है और दो पैसे कमाने के लिए इस ठंडी के मौसम में भी कुछ भी काम बहुत ही कम मूल्य में करने के लिए तैयार है

लेकिन कोई भी इंसान उनसे काम नहीं करवाना चाहता है  क्योंकि  लोगों का मानना है  जो इंसान चंद पैसों में किसी भी प्रकार के काम को करना चाह रहा है

हो सकता है उस इंसान क्या उस काम के प्रति ज्ञान  नहीं भी हो सकता है और पैसों के लालच में ऐसा करने के लिए तैयार  हो गया इसी प्रकार के मनोभाव होने की वजह से

कुछ ऐसे भी लाचार गरीब लोग होते हैं जिन्हें शहंशाह अकबर के सल्तनत में काम नहीं मिल पाता और वे  गरीबी और ठंडी के वजह से और भी ज्यादा दुखो का सामना कर रहे हैं

10 मुद्रा की कीमत भाग 2

ऐसे ही इंसान को ढूंढने के लिए शहंशाह अकबर ने राजा  बीरबल को आदेश दिया राजा बीरबल शहंशाह अकबर के आदेश के खिलाफ नहीं जा सकते हैं और उनका हुकुम हमेशा मानते हैं

इसीलिए राजा बीरबल ने एक ऐसे इंसान को ढूंढ निकाला जो बिल्कुल शहंशाह अकबर जैसा चाहते थे वैसा ही था जो बहुत ही ज्यादा लाचार था और ठंडी के मौसम में चंद पैसे कमाने के लिए कुछ भी करने के लिए तैयार था

 शहंशाह अकबर का उद्देश्य था कि उनके बगीचे में जो तालाब है उस तालाब का पानी बहुत ही ज्यादा ठंडा है और क्या  मेरे सल्तनत में ऐसा कोई इंसान है

जो चंद पैसों में इस कठिन काम को करने के लिए तैयार हो सके क्योंकि यह तालाब का पानी इतना ज्यादा ठंडा है अगर कोई भी इंसान इस तालाब के अंदर कुछ समय तक रहता है  तो उसकी मौत भी हो सकती है

 शहंशाह अकबर यह देखना चाहते  थे कि उनके सल्तनत में रहने वाले आम जनता कितनी ज्यादा मेहनती है और उनसे भी ज्यादा वह गरीब इंसान जो पैसों के लिए कुछ भी करना चाहता है

ताकि उसे दो पैसे मिले और वह अपने परिवार की देखभाल कर सकें शहंशाह अकबर यह भी देखना चाहते थे कि उनके सल्तनत में गरीबी की  सीमा कहां तक पहुंची हुई है और इसे ठीक करने के लिए उन्होंने सुरेश नाम के एक लाचार इंसान जिस को अकबर ने ढूंढ निकाला था उसकी मदद  लिया

10 मुद्रा की कीमत भाग 3

 सुरेश एक बहुत ही ज्यादा गरीब इंसान था जिसे अपनी पत्नी और अपने बच्चों के लिए खाना और गर्म कपड़े चाहिए थे जिसके लिए  वह बहुत ही ज्यादा मेहनत करना चाह रहा था,

गरीबी की वजह से खाना ना मिलने की वजह से मैं सुरेश का शरीर बिल्कुल अकड़ गया था और सुरेश बिल्कुल सूख गया था जिस वजह से कोई भी इंसान उस से काम नहीं करवाना चाहता था

इस डर में अगर कोई इंसान उससे किसी भी प्रकार का भारी काम करवाता है और उस भारी काम को करने के चक्कर में अगर सुरेश मारा जाता है तो उसका दोस्त उस इंसान पर आएगा

और इसी डर की वजह से सुरेश बहुत ही ज्यादा गरीब हो गया था क्योंकि बिना काम मिलने की वजह से उसे किसी भी प्रकार  से पैसा नहीं कमा पा रहा था और बिना खाने  पीने की वजह से उसकी हालत दिन प्रतिदिन बदतर होती जा रही थी

 तभी राजा बीरबल की नजर उस पर पड़ी और राजा बीरबल ने ठीक किया कि हमारी सल्तनत में इससे ज्यादा लाचार इंसान और कोई हो नहीं हो सकता

 शहंशाह अकबर चाहते थे कि  ऐसा लाचार इंसान को जो 10 मुद्रा जो मुगल सल्तनत में बहुत ही ज्यादा कम है इतने कम पैसों के लिए  कौन सा इंसान काम करने के लिए तैयार होता है

इस चीज को देखना चाहते थे और शहंशाह की इच्छा पूरी हुई  राजा बीरबल ने सुरेश को राज महल में लेकर आए और कहा कि यह इंसान 10 मुद्रा के बदले आपके राज्य का किसी भी प्रकार का काम करने के लिए तैयार है

 बादशाह अकबर सुरेश के हाल को देखकर बहुत ही ज्यादा अफसोस करने लगे और उन्होंने अपने सिपाहियों से अपने बावर्ची  द्वारा स्वादिष्ट भोजन पकवान बनाकर सुरेश को खिलाने के लिए कहा लेकिन सुरेश अपने परिवार को बहुत ही ज्यादा चाहता था इसलिए उसने कहा कि मुझे जो भी खाना खिलाना  चाहते हैं वह आप मुझे ना खिला कर के मेरे परिवार के पास भिजवा दें आपकी बड़ी कृपा होगी

10 मुद्रा की कीमत भाग 4

 शहंशाह अकबर ने सुरेश द्वारा कही बात को मानते हुए उसके परिवार के पास एक हफ्ते का खाना भिजवा दिया और उसके बाद शहंशाह अकबर ने  सुरेश से कहा कि –

”तुम्हें मेरा एक काम करना है मैं देखना चाहता हूं कि तुम्हारी धैर्य शक्ति कितनी ज्यादा है मैं तुम्हें 10 मुद्रा दूंगा और उसके बदले में तुम्हें मेरे बगीचे की ठंडे पानी वाले तालाब में पूरे एक रात तक रुकना होगा

और अगर इस दौरान तुम्हारी मृत्यु हो जाती है तो तो हम किसी मेदार  जिम्मेदार  नहीं  होंगे इसीलिए  इसलिए इतने चंद पैसों के लिए अगर तुम अपनी जिंदगी को  दांव पर लगाना चाहते हो तो हम तुम्हें नहीं रुकेंगे लेकिन जो फैसला तुम्हारा होगा उस पर अमल किया जाएगा

10 मुद्रा की कीमत भाग 5

 सुरेश अपनी जिंदगी के बारे में एक पल के लिए भी नहीं सोच रहा था वह सिर्फ अपने परिवार को खाना खिलाने के लिए सोच रहा था और उसका उद्देश्य था 10 मुद्रा जो शहंशाह अकबर द्वारा उसे प्राप्त होने वाली है

और इसी वजह से हम शहंशाह अकबर द्वारा जो आदेश दिया गया है उसे पूरा करने के लिए दो सिपाहियों  को उसके पीछे लगा दिया गया था सुरेश का काम था –

कि उसे कुछ भी करके  पूरी ठंडी  की रात बगीचे में जो तालाब है उसके अंदर जाकर बितानी होगी और सुबह होने पर उस तालाब से निकलकर बाहर आना होगा

शहंशाह द्वारा दिए इस आदेश का पालन करने के लिए सुरेश रात को उस तालाब के अंदर  था पूरी रात ठंड के वजह से उसका पूरा शरीर  अकड़ गया था

उसे बहुत ही ज्यादा तकलीफ हुआ लेकिन वह तकलीफ की चिंता न करते हुए शहंशाह अकबर के  हुकुम को पालनकर्ता गया और उसके द्वारा की हर एक कार्य को दो सिपाही पूरी रात देखते रहे

 सुबह जब शहंशाह अकबर के राज्यसभा में अकबर ने सुरेश से पूछा क्या तुम हमारे दिए आदेश  को पालन करने में सफल रहे तो उत्तर में दोनों सिपाही ने उसकी सफलता का बयान दिया

 फिर शहंशाह अकबर ने सुरेश से पूछा कि तुमने किस तरह इस तालाब के अंदर एक रात बिताया हम इस बारे में तुमसे सच्चाई जानना चाहते हैं तभी उत्तर में सुरेश ने कहा कि

मैंने आप के तालाब के बाहर एक दिया चल रहा था उसी  को देख कर अपना पूरा ध्यान उस पर केंद्रित किया और अपने शरीर में हो रहे सभी प्रकार के हलचल को महसूस करते हुए भी नजरअंदाज किया  और इसी तरह में पूरी रात तालाब के अंदर  बिताने में सफल रहा

10 मुद्रा की कीमत भाग 7

 शहंशाह अकबर का कहना है कि उसने यह की तरफ देखकर अपने साथ हो रहे सभी प्रकार के तकलीफों को नजरअंदाज किया इसका पूरा अर्थ है कि सुरेश ने शहंशाह अकबर द्वारा दिए काम को ध्यान से नहीं किया

और पूरी रात दिए की ओर देखता रहा और जिस वजह से शहंशाह अकबर ने यह फैसला किया कि सुरेश 10 मुद्राओं के लायक नहीं है क्योंकि उसने शहंशाह अकबर ने जो काम दिया था

उस काम को करने के लिए अपने शरीर को गर्म रखने की कोशिश की और जिसके लिए उसने एक भी की सहायता लिया जिससे उसे गर्मी मिलती रहे

 राजा बीरबल  शहंशाह अकबर के इस प्रकार की बेबुनियाद बातें को सुनकर सुरेश का पक्ष लिया और कहा कि इतनी दूर इस दिए को देखने से किस प्रकार सुरेश को गर्मी मिल सकती है

कृपया इस बात का आपके पास  कोई प्रमाण है ?  लेकिन शहंशाह क्रोध में होने की वजह से राजा बीरबल ने मौन रहना ही उचित समझा और शहंशाह अकबर ने बीरबल के द्वारा पूछे इस उत्तर को देना सही नहीं समझा और सुरेश मायूस होकर राजभवन से अपने घर के लिए निकल गया

10 मुद्रा की कीमत भाग 6

 शहंशाह अकबर ने अपनी बुनियादी बातों के दम पर राजा बीरबल को उनके  तर्क पर हरा दिया और इस बात को यहीं पर  खत्म करने के लिए राजा बीरबल को हुकुम दिया राजा बीरबल ने शहंशाह अकबर के बाद का मान रखते हुए सुरेश के कहानी को इसी जगह बंद करना सही समझा

 अगले ही दिन शहंशाह अकबर को राजा बीरबल की बहुत ज्यादा जरूरत पड़ी क्योंकि ईरान के बादशाह का जन्मदिन था और ईरान के बादशाह के जन्मदिन के मौके पर उन्हें तोहफे भेजे जाने थे

जिसका चयन करने में  शहंशाह अकबर को राजा बीरबल की आस मदद की जरूरत थी और इसी वजह से  राजा बीरबल को राजभवन में लाने के लिए शहंशाह अकबर ने अपने दो सिपाहियों को राजा बीरबल के घर पर भेजा

 कुछ देर बाद  सिपाही राजभवन खाली हाथ लौट आए और जब बादशाह अकबर ने उन सिपाहियों के खाली हाथ लौटने की वजह पूछी  तो सिपाहियों ने कहा कि –

राजा बीरबल अभी खाना बना रहे हैं और उन्होंने यह संदेशा भेजा है कि उनका खाना बनाना खत्म हो जाए तो उसे राजभवन के लिए प्रस्थान करेंगे

 शहंशाह अकबर आधे प्लाट तक राजा बीरबल  के लिए इंतजार करते रहे जब पूरा पर बीतने लगा और दोपहर होने लगा उन्होंने राजा बीरबल को अपने घर से लाने के लिए राजा बीरबल के घर की ओर प्रस्थान करने लगे

और उन्होंने राजा बीरबल के घर में जाकर देखा कि बीरबल अपने आंगन में खिचड़ी पका रहे थे और  खिचड़ी पकाने के लिए बीरबल ने एक ऐसे बर्तन का सहायता लिया

जो आग से बहुत ही दूर एक डंडे के ऊपर लटका हुआ था जिस पर आग ना के समान पहुंच रहा था  और वे उस खिचड़ी बन रहे बर्तन के पास बैठकर आग की पहुंचने की प्रतीक्षा कर रहे थे

तभी शहंशाह अकबर ने राजा बीरबल को इस प्रकार के प्रयोग करते हुए देखा और कहा कि देखो बीरबल इस बर्तन के पास आग नहीं पहुंच रही और बिना आग के कोई भी बर्तन में गर्मी पैदा नहीं होगी और तुम्हारी खिचड़ी नहीं बनेगी

 शहंशाह अकबर के इस बात को सुनकर राजा बीरबल ने अकबर से पूछा कि अगर इस बर्तन के साथ ऐसा हो सकता है कि उस पर आग नहीं पहुंचे थे जिस वजह से यह खिचड़ी बन नहीं रही

तो सुरेश के साथ भी ऐसा ही कुछ हुआ था बिना आग के पास पहुंचे उसे गर्मी कैसे मिल सकती है वह तो सिर्फ अपने  शरीर में लग रहे ठंड को कम करने के लिए अपने ध्यान को ठंड से दूर हटा कर उस दिए की ओर केंद्रित कर रहा था

ताकि उसे काम करने के लिए जो शक्ति की जरूरत है वह उसे मिलती रहे और उसे तकलीफ भी कम हो सुरेश इमानदारी से आपके द्वारा दिए आदेश को ही पालन कर रहा था

लेकिन उसे तकलीफ ना हो इसी वजह से वह सिर्फ दिए की और ध्यान केंद्रित कर रहा था ना ही कि उस दिए से अपने शरीर को गर्म कर रहा था और  आपने सुरेश के ऊपर मनोवैज्ञानिक दबाव डालकर उसे गलत प्रमाणित करके अपने घर भेज दिया

 शहंशाह अकबर को अपने द्वारा किए इस गलती का अहसास हुआ और उन्होंने तुरंत  अपने सिपाहियों को सुरेश के घर पर भिजवाया और उसे सम्मान के साथ फिर से राज्यसभा में बुलाया गया

जहां पर शहंशाह अकबर ने सुरेश को 10 मुद्राओं की जगह 1000 मुद्राओं से उसे पुरस्कृत किया और उसी के साथ राजा बीरबल को 10000 मुद्राओं के साथ पुरस्कृत किया

अपने शहंशाह के द्वारा किए इस  गलती को नजरअंदाज ना करके इसका विरोध करने के लिए और शहंशाह की आंखों से घमंड के पट्टे उतारने के लिए  शहंशाह अकबर ने बीरबल  का आभार  प्रकट किया

 

 

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