Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 2

Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 2 – स्वागत है आपका हमारे ब्लॉक में इस   ब्लॉग के संस्करण के माध्यम से हम आज राजा बीरबल  ने शहंशाह अकबर के द्वारा माने जाने वाले दो  अविश्वसनीय तत्व के ऊपर से पर्दा हटाया

जिसमें सबसे पहला था कि शहंशाह अकबर को लगता था कि आलू जो एक सब्जी है वह इस संसार का सबसे पसंदीदा सब्जी है और दूसरा था राजा बीरबल एक हिंदू  धर्म के इंसान थे और वे भगवान में बहुत ही ज्यादा मानते थे 

शहंशाह अकबर ने उनसे पूछा कि  आपके भगवान जिस भी चीज को इस धरती पर बना कर भेजते हैं उस पर अगर किसी भी प्रकार  की आपत्ति आती है

तो वे खुद क्यों उसे बचाने के लिए इस धरती पर रूप लेकर आते हैं  राजा बीरबल  ने इन दो बातों  को प्रमाणित करने के लिए दो  प्रयोग बादशाह अकबर पर किया जिसके बारे में हम इस कहानी के माध्यम से  सीखेंगे

इस कहानी के माध्यम से हम यह सीखने की कोशिश करेंगे कि किसी भी प्रिय चीज को अगर दुख होती है तो उस चीज के सृष्टिकर्ता  बहुत ही ज्यादा दुखी हो जाते हैं

और उस चीज को अथवा उस इंसान को  मुसीबत से निकालने के लिए किस प्रकार चले जाते हैं इसका एक दुर्लभ  प्रमाण राजा बीरबल द्वारा इस कहानी में दिया गया है

 इस अलावा बीरबल ने किस प्रकार शहंशाह अकबर के सबसे प्रिय सब्जी आलू  को बिना व्यंजन के रूप में उनके सामने प्रस्तुत करके आलू के लिए शहंशाह के मन में जो आधा अधूरा ज्ञान था उसे पूर्ण किया और एक सटीक दिशा  दिखाया

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Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 2

सबसे प्यारी वस्तु भाग 1

एक बार की बात है जब शहंशाह अकबर अपने सभी सभासदों के साथ अपने रात सभा में बैठे हुए थे और एक बहुत ही ज्यादा गंभीर विषय पर चर्चा हो रहा था तभी बादशाह अकबर ने  सब्जी के बारे में बात करना शुरू किया

और अकबर ने कहा कि आलू एक ऐसा सब्जी है जिसे कोई भी इंसान जितना भी चाहे उतना खा सकता  है और कभी भी इस सब्जी के बिना खाना नहीं खा सकता

आलू एक ऐसा सब्जी है जो अगर किसी एक व्यंजन में ना मिला हो तो वह व्यंजन अधूरा लगता है शहंशाह अकबर के इस बात को सभी ने स्वीकारा और कहा कि इस सभा में बैठे सभी व्यक्ति के लिए आलू एक प्रिय सब्जी है

तो क्यों ना इसे हम हमारे राज्य  मैं सब्जियों का राजा घोषित कर दे शहंशाह अकबर के इस बात को सुनकर सभी सभासदों बहुत ही ज्यादा खुश हो गए

और सभी की राय जानने लगे हमेशा की तरह राजा बीरबल शहंशाह अकबर की इस बात पर चुप रहे और राजा बीरबल के इस प्रकार मौन धारण करने की वजह से शहंशाह अकबर ने खुद को  रोक नहीं पाए

और पूछने लगे कि आप मौन क्यों है आपके हिसाब से क्या आलू एक अच्छी सब्जी नहीं है ? क्या आप अपने भोजन में बिना आलू के ग्रहण कर सकते हैं?

उत्तर में राजा बीरबल ने कहा कि शहंशाह अकबर आपकी बात एक दम सही है आलू एक बहुत ही अच्छा सब्जी है लेकिन सभी के लिए आलू प्रिय होगा ऐसा जरूरी नहीं है हो सकता है ऐसा जरूरी नहीं है कि समाज के हर एक वर्ग के लोग आलू को पसंद करते होंगे

सबसे प्यारी वस्तु भाग 2

शहंशाह अकबर राजा बीरबल की इस प्रकार के मत को सुनकर बहुत ही ज्यादा क्रोधित हो गए और कहने लगे कि आप कभी भी हमारे किसी भी बात को एक ही बार में समर्थन नहीं करते

आप हमेशा हमारे बात को गलत प्रमाण करने के लिए तैयार रहते हैं क्या हम जान सकते हैं कि आपने इस बार आलू जिससे प्रिय सब्जी को गलत प्रमाण करने के लिए क्या ऐसा प्रयोग करने का सोचा है

 हम आपको आदेश देते हैं कि अगर आपने हमारा यह दावा गलत कर दिखाया तो हम कभी भी आलू जैसे प्रिय सब्जी को हाथ तक नहीं लगाएंगे लेकिन आपको प्रमाण करना होगा कि आलो सभी के लिए प्रिय नहीं है और कोई इंसान हमेशा आलू को नहीं खा सकता

इसी के साथ शहंशाह ने अपने बारे में भी कहा कि वे आलू को किसी रूप में भी खा सकते हैं  जितने प्रकार के आलू के पकवान बन सकते हैं सभी प्रकार के आलू के पकवानों को भी खा सकते  है आलू हमेशा के लिए प्रिय सब्जी रहेगा

इसके अलावा शहंशाह अकबर ने राजा बीरबल से दूसरा सवाल पूछा जिसमें शहंशाह अकबर ने कहा कि राजा बीरबल आपके हिंदू धर्म में बहुत सारे देवी देवता है

और जिसमें आपके भी इष्टदेव है हर एक इंसान अपने हिसाब से भगवान को चुनता है और उनकी पूजा करता है जिसमें किसी भी प्रकार का रोक-टोक नहीं है

लेकिन मुझे आप इस बात को समझाइए आपके हिंदू धर्म में में ऐसा क्यों लिखा हुआ है कि जब भी कोई भगवान की प्रिय वस्तु  अथवा प्रिय इंसान मुश्किल में पड़ता है

तो भगवान उसे खुद बचाने क्यों आते हैं क्या उस वस्तु या इंसान में इतनी शक्ति नहीं होती कि वह अपनी खुद की रक्षा खुद कर पाए इस बात का उत्तर मुझे आप समझाइए और इस बात को आप मुझे प्रमाण करके दिखाएंगे तो ज्यादा बेहतर होगा

 शहंशाह अकबर  किस बात पर राजा  बीरबल ने प्रमाण के माध्यम से समझाने का पक्ष रखा और कहा कि इस बात को मैं बहुत ही जल्द आपके सामने प्रमाण करके दिखाऊंगा कि क्यों भगवान अपने प्रिय वस्तु अथवा इंसान को मुसीबत में देख नहीं पाते और खुद धरती पर उसे बचाने के लिए आते हैं

सबसे प्यारी वस्तु भाग 3

सभा खत्म होने के बाद राजा बीरबल और शहंशाह अकबर दोपहर के भोजन के लिए आमने सामने बैठ गए और दोनों ही बैठकर बहुत ही गंभीर विषय पर चर्चा कर रहे थे

तभी शहंशाह अकबर के शाही बावर्ची जो अकबर के सभी प्रकार के खाने को बनाते हैं उनका परीक्षण करते हैं और फिर शहंशाह अकबर के सामने हाजिर किया जाता है उसे शहंशाह अकबर

और राजा बीरबल के लिए आठ प्रकार के पकवान लेकर अकबर के सामने हाजिर होते हैं और जैसे ही अकबर ने सभी प्रकार के पकवानों के ढक्कन हटाकर देखना शुरु किया वे देखते हैं की हर एक पकवान आलू का बना हुआ है

जिसमें किसी और सब्जी नहीं है सिर्फ आलू की ही टेंशन है इसमें आलू के पकोड़े , आलू की तरकारी , भुने हुए आलू  जैसे पकवान थे अकबर सभी प्रकार के आलू के पकवान को देखकर बहुत ही ज्यादा गुस्से में आ गए थे

और उन्होंने बावर्ची से कहा कि “इस तरह के पकवान तुमने क्यों बनाएं किसी और सब्जी पकवानों में क्यों नहीं है बावर्ची उत्तर में कहता है की शहंशाह मुझे पता चला है कि आप आलू सब्जी को बहुत ही ज्यादा प्रेम करते हैं बहुत ही ज्यादा आपके दिल के करीब है “

“और आप किसी भी रूप में इसे खा सकते हैं और इसी वजह से राजा बीरबल ने मुझे आपके लिए आलू के सभी प्रकार के पकवान बनाने के लिए आदेश दिया था “

और मैंने उन्हीं का आदेश पालन करते हुए आलू के सभी प्रकार के पकवान बनाकर आपके सामने हाजिर की है ताकि आप इन सभी भगवानों को खाकर बहुत ही ज्यादा खुश हो  जाए और जब से मुझे बहुत ही ज्यादा खुशी की अनुभूति होगी

सबसे प्यारी वस्तु भाग 4

उत्तर में शहंशाह अकबर  ने कहा कि बेशक मुझे आलू पसंद है लेकिन इतना भी नहीं कि मैं उससे खाली खा सकूं ऐसे तो किसी को भी आलू अच्छा नहीं लगेगा किसी ना किसी प्रकार के दूसरे सब्जी आलू के साथ होना चाहिए था तब जाकर आलू को खाने का मजा  होता

 राजा बीरबल ने शहंशाह अकबर के इस बात को पकड़ते हुए कहा कि महाराज में यही आप को समझाने की कोशिश कर रहा था कि आलू हमेशा किसी इंसान के लिए प्रिय नहीं हो

सकता क्योंकि आलू एक ऐसा सब्जी है जिसे आप सभी प्रकार के व्यंजन के साथ मिलाकर खा सकते हैं अकेले आलू के आठ पकवान  बनाकर आपके सामने हाजिर करने पर आप गुस्सा हो गए हैं

तो सोचिए पूरे राज्य में जब आप आलू को सब्जियों का बादशाह एलान करेंगे तो सभी को सिर्फ आलू के ही पकवान बनाकर खाने होंगे और ना चाहते हुए भी आलू को अच्छा कहना पड़ेगा जो किसी भी रुप से ठीक नहीं होगा

राजा बीरबल के इस बात को सुनकर शहंशाह अकबर मुस्कुराया और कहने लगे कि तुम हमेशा ठीक ही रहते हो हम तुम्हें नहीं समझ पाते तुम्हारे ज्ञान के सामने हमारी हर एक बात गलत साबित होती है

लेकिन तुम हमेशा हमारे राज्य के भले के बारे में सोचते हो  जिसके लिए मैं हमेशा  तुम्हारा शुक्रगुजार रहूंगा शहंशाह अकबर ने कहा कि तुमने आलू के इस तर्क को  मुझे प्रमाण करके दिखा दिया

लेकिन मैं चाहता हूं कि तुम मेरे दूसरे सवाल  कि भगवान अपने  प्रिय वस्तु अथवा इंसान को मुसीबत में  देख कर क्यों खुद को रोक नहीं पाते हैं और बचाने के लिए धरती पर आ जाते हैं इसका प्रमाण तुमने अभी तक मुझे प्रस्तुत नहीं किया

राजा बीरबल ने उत्तर में कहा कि मैं आपको इसका प्रमाण 1 दिन के अंदर ही दे दूंगा जिसके बाद आप इस सवाल से वाकिफ हो जाएंगे कि क्यों ऐसा भगवान अपने बंदों के लिए करते हैं

सबसे प्यारी वस्तु भाग 5

अगले दिन सुबह जब  शहंशाह अकबर अपने बगीचे में टहल रहे थे बगीचे के ठीक बीच में एक छोटा सा तैरने का तालाब था जिसके सामने  महारानी अपने छोटे से राजकुमार को लेकर खड़ी हुई थी

अचानक से पानी उनके पैरों में लग जाने की वजह से  महारानी के हाथ से उनके पुत्र पानी में गिर जाते हैं तभी शहंशाह अकबर उस मंजर को देख कर डर जाते हैं

और अपने सिपाहियों को चिल्लाकर बुलाने लगते हैं लेकिन सिपाही जैसे ही जाने लगते तभी शहंशाह अकबर खुद को रोक नहीं पाते हैं और खुद ही जाकर उस तालाब में छलांग लगा देते हैं 

और अपने डूबते बच्चे को बचा लेते हैं लेकिन जैसे ही  वह उस बच्चे को तालाब से निकालकर महारानी के गोद में देते हैं वे देखते हैं कि  यह एक राजकुमार के जैसा दिखने वाला बच्चे का पुतला है

जिसे  महारानी ने तालाब में जानबूझकर अपने हाथ से छोड़ दिया था और महाराज को लगा कि वह बच्चे का पुतला शहंशाह का पुत्र है और उसे बचाने के लिए शहंशाह खुद को रोक नहीं पाए और जाकर  तालाब में डुबकी लगा दिया

सबसे प्यारी वस्तु भाग 6

शहंशाह अकबर ने जब देखा कि वह बच्चा एक पुतला है तब रे महारानी के ऊपर बहुत ही ज्यादा क्रोधित हुए और उन्हें पूछने लगे कि इस तरह की बचकानी हरकत करने के लिए

आपको किसने कहा था  तभी राजा बीरबल ने महारानी का पक्ष लेते हुए कहा कि शहंशाह अकबर आप महारानी को कुछ भी मत कहिए यह सब के पीछे मेरा ही हाथ था

मैंने जान बूझकर महारानी के हाथ में  राजकुमार के जैसा दिखने वाला एक मिट्टी का पुतला दिया था  और  जब आप महारानी की ओर देख रहे थे तभी महारानी ने जान बूझकर उस मिट्टी के पुतले को तालाब में फेंक दिया

ताकि आप खुद को रोक ना पाए और राजकुमार  को बचाने के लिए तालाब में कूद पड़े तब शहंशाह अकबर को अपने द्वारा पूछे सवाल का एहसास हुआ कि

क्यों भगवान खुद अपने द्वारा बनाए इंसान को मुसीबत  मैं देखकर रोक नहीं पाते हैं और खुद उसे बचाने के लिए धरती पर आ जाते हैं उसी का एक उदाहरण आज राजा बीरबल ने अपने द्वारा रचित नाटक के माध्यम से उन्हें समझाने की कोशिश की

जब उन्होंने देखा कि जान से भी ज्यादा प्रिय राजकुमार महारानी के हाथ से फिसल कर तालाब में गिर रहा था लेकिन सभी सिपाहियों को बुलाने के बावजूद कोई भी सामने नहीं आ रहा था

तब शहंशाह ने खुद को  रोक नहीं पाए और जाकर तालाब में छलांग लगा दिया क्योंकि राजकुमार बहुत ही ज्यादा प्रिय थे शहंशाह के लिए और कोई भी प्रिय चीज अगर मुसीबत में होती है तो उस चीज के मालिक को अच्छा नहीं लगता और उसे मुसीबत से निकालने के लिए मालिक खुद चला जाता है

 ऐसा ही कुछ भगवान अपने द्वारा बनाएं इंसान के साथ करते हैं जब देखते हैं कि उनके द्वारा बनाया गया इंसान बहुत ही ज्यादा परेशान है मुसीबत में है

और किसी भी प्रकार  की मदद उसे नहीं मिल रही थी तब भगवान खुद इंसान के रूप में धरती पर आते हैं उसे बचाने के लिए और उसकी मुसीबत को दूर करके उसे फिर से पहले जैसा बना देते हैं

इसी तरह राजा बीरबल ने शहंशाह अकबर द्वारा पूछे गए दोनों पहेलियों के जवाब प्रमाण के सहित शहंशाह अकबर के सामने प्रस्तुत किया और फिर से एक बार राजा बीरबल शहंशाह अकबर के सामने महान साबित हुए और उनकी हर एक बात कितनी सही है उसका प्रमाण मिला

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