Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 1

Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 1 – स्वागत है आपका हमारे इस ब्लॉग पोस्ट में इस ब्लॉग पोस्ट के माध्यम से हम प्रथम कक्षा के बच्चों को अकबर और बीरबल की ऐसी एक कहानी से साक्षात्कार करवाने जा रहे हैं जिसके माध्यम से बच्चों में सभी प्रकार के निष्पाप तथा अच्छी भावनाओं का जन्म होगा |
जिससे से आगे वाले जीवन के सभी भागों में एक अनोखी भूमिका का पालन कर पाएंगे इसके अलावा यह कहानी सभी बच्चों को अपनी बुद्धि का इस्तेमाल करने के लिए प्रेरित करेंगी इसके अलावा यह कहानी बच्चों के मनोवैज्ञानिक भ्रमों का पतन करने में भी मदद करेगी ||
इस कहानी में मनोवैज्ञानिक ब्रह्म कहने का मतलब यही है कि कुछ ऐसे अंधविश्वास जो लोगों द्वारा समाज में पानी की तरह बहती जा रही है और जिसमें बच्चों के वर्ग में सबसे ज्यादा प्रेरित किए जा रहे हैं इस प्रकार के अंधविश्वास को मानने के लिए
इस कहानी में राजा बीरबल ने ऐसे ही एक अंधविश्वास को अपने बुद्धि की मदद से हराने में सफल हुए तथा शहंशाह अकबर और उनके मंत्रियों को एक सटीक दिशा भी दिखाई जिससे शहंशाह अकबर के दिमाग से अंधविश्वास को लेकर जागरूकता आई

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Akbar Birbal Stories In Hindi For Class 1

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एक बार की बात है जब शहंशाह अकबर क्योंकि सभासदों के साथ बैठे हुए थे और सभी मिल विषय पर चर्चा कर रहे थे कि सबसे ज्यादा बुद्धिमान इंसान कौन है
जिस जवाब के उत्तर में शहंशाह अकबर बीरबल का पक्ष लेते हुए कि मेरी नजरों में बीरबल से बड़ा बुद्धिमान व्यक्ति इस राज्य सभा में मौजूद नहीं है क्योंकि इस राज्य की हर प्रकार की सुविधा और दूसरे देशों के शहंशाह द्वारा भेजी गई चुनौतियों को सिर्फ राजा बीरबल ने अकेले हल किया था

शहंशाह अकबर का कहना है कि राजा बीरबल हमारे नवरत्नों में से एक है और जो सबसे ज्यादा हमारे लिए मूल्यवान और सबसे ज्यादा बुद्धिमान है बीरबल को हमने बहुत सारे मापदंडों के आधार पर हमारे राज्य के सभासद के रूप मे चयन किया है और जो हर एक ज्ञान बुद्धि चला की शक्ति हर एक विषय में से आगे है

शहंशाह अकबर के इस बात को सुनकर राज्यसभा में मौजूद हर एक मंत्री बादशाह अकबर के पक्ष में कहने लगा और सभी ने इस बात को स्वीकार किया कि राजा बीरबल एक बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान व्यक्ति है

लेकिन जब शहंशाह अकबर ने  मानसिंह को इस बारे में पूछा तब मान सिंह ने शहंशाह अकबर के  बात की विरोध करते हुए कहा कि ऐसा जरूरी नहीं है कि बीरबल हर एक मामले में हम सभी  बुद्धिमान हो

हो सकता है कि  विरोध कुछ  कमियां हो जो हमें ना  इसलिए  आप हर एक  क्षेत्र में बीरबल को पारंगत है ऐसा नहीं कह सकते हैं , मानसिंह के इस बात को सुनकर सभा में उपस्थित सभी मंत्री दलों ने मानसिंह की बात को मानते हुए कहा –

“अगर सच में  राजा बीरबल इतने ही बुद्धिमान हैं तो  हमारी एक चुनौती को पूरा करके दिखाएं और अगर वे इस चुनौती  में सफल होते हैं तो हम इस बात को हमेशा के लिए स्वीकार कर लेंगे कि बीरबल जैसा दूसरा कोई इस मिट्टी में जन्म नहीं लिया  है जिसे बुद्धि के मामले में कोई  हरा पाए “

दूध देने वाला गधा भाग 2

बादशाह अकबर सभी  मंत्रियों के बातों को सुनकर बहुत ही ज्यादा चिंतित हो गए क्योंकि बादशाह अकबर खुद  से ज्यादा राजा बीरबल के ऊपर विश्वास रखते हैं

और अगर राजा बीरबल  मंत्रियों के द्वारा दिए चुनौतियों में नाकाम रहे तो शहंशाह अकबर का नाम खराब हो जाएगा और बादशाह अकबर ने राजा बीरबल को कहा कि अब मेरी इज्जत तुम्हारे हाथों लिखी हुई है

अगर तुम सच में इन्हें प्रमाण करके दिखाते हो तो हम तुम्हें 100 घोड़े इनाम में देंगे और यह हम भी जानना चाहेंगे कि तुम कैसे इस पहेली को सुलझा  पाते हो

और सब को फिर से एक बार  यह प्रमाण करने में सक्षम होते हो कि तुम्हारे जैसा दूसरा बुद्धिमान इंसान इस पूरे संसार में कोई नहीं है हम इस बात  को इस राज सभा में मौजूद सभी इंसान से सुनने के लिए  इंतजार करेंगे

 सभी  मंत्रियों ने 1 दिन का  समय दिया और कहा कि इस 1 दिन में आपको राजा बीरबल के लिए एक ऐसी  पहेली को तैयार करना होगा  जिसे हल करना किसी के लिए भी आसान ना हो

शहंशाह अकबर के इस आदेश पर सभी मंत्रियों ने सोचना शुरू किया और राजा बीरबल के लिए एक ऐसा पहेली ढूंढ कर निकाला जो नामुमकिन था

क्योंकि बादशाह अकबर के राज्य में अंधविश्वास के ऊपर लोग कुछ ज्यादा ही मानते थे और इसी कारण सभी मंत्रियों ने राजा बीरबल से कहा कि हमें आप एक ऐसे गधे को ढूंढ के दिखाइए जो दूध देता है

राजा बीरबल मंत्रियों के इस पहेली को सुनकर चौंक गए और कहने लगे कि इस नामुमकिन कार्य को कोई भी नहीं कर सकता आप बेवजह  राजा बीरबल को नीचा दिखाने के लिए ऐसी पहेली देने जा रहे हैं जो प्रकृति के खिलाफ है

हम सभी को पता है कि एक गधा दूध नहीं दे सकता फिर भी आप जानबूझकर राजा बीरबल को एक ऐसी पहेली को सुलझाने के लिए दे रहे हैं जिसका किसी भी प्रकार का अस्तित्व इस संसार में मौजूद ही नहीं है

किसी एक गधे से दूध  निकालना कुछ ऐसा ही होगा जैसे आसमान की तरफ देखकर हुकुम करना कि आसमान बारिश करें  किसी भी प्रकार के पहेली को सुलझाने के लिए उसका अस्तित्व होना बहुत ही ज्यादा जरूर है

लेकिन इस मामले में किसी भी प्रकार की प्राथमिक कारण को विश्लेषण  किए बिना चुनौती को प्रस्तुत करना खुद को मूर्ख प्रमाण करने की जैसा है

शहंशाह अकबर के बात को सुनकर मंत्री मंडल ने उत्तर में कहा कि हम सभी ने यह निर्णय बहुत ही सोच समझ कर लिया है अगर राजा बीरबल हमें किसी भी प्रकार से इस चुनौती को हल करके दिखा पाते हैं तो हम सभी उनको इस राज्य का सबसे बुद्धिमान इंसान मानने के लिए तैयार है

दूध देने वाला गधा भाग 3

शहंशाह अकबर के मंत्री दल के प्रमुख सुखदेव ने कहा कि अगर राजा बीरबल सच में ही इतने ही ज्यादा बुद्धिमान है तो हमारे इस पहेली को हल करके दिखाएं अगर इस पहेली को राजा बीरबल  हल कर लेते हैं

तो हम  जिंदगी में दूसरी बार कभी भी राजा बीरबल को ज्ञान की परीक्षा  देने के लिए मजबूर नहीं करेंगे और कभी भी उनसे बराबरी करने की नहीं पूछेंगे लेकिन

अगर आज राजा बीरबल पहेली को सुलझाने में नाकाम रहे तो  राजा बीरबल को अपने पद से इस्तीफा देना होगा और यह मानना होगा कि वे हम सभी की तरह एक साधारण इंसान हैं और ज्ञान भी हम सभी के समान है

 राजा बीरबल ने इस बात का विरोध करते हुए कहा ज्ञान में कोई किसी की बराबरी नहीं कर पाता ज्ञान सभी अपने  मेहनत द्वारा प्राप्त करते हैं अगर आप मेहनत द्वारा अपने ज्ञान को बढ़ाते हैं तो यह आपके लिए अच्छा होगा

अगर मैं अपने ज्ञान को मेहनत के माध्यम से बढ़ाता हूं तो यह मेरे लिए अच्छा होगा  इस संसार में हर कोई इंसान बहुत ही ज्यादा खास है किसी के पास ज्ञान कम है

और किसी के पास ज्ञान ज्यादा है लेकिन अगर कोई इंसान अपने मेहनत से ज्ञान को प्राप्त करता है तो वह सम्मान का अधिकारी है  क्योंकि उसके द्वारा प्राप्त किए ज्ञान से किसी का भला हो सकता है किसी मुसीबत  का सामना करने में  थोड़ी मदद मिल सकती है

दूध देने वाला गधा भाग 3

राजा बीरबल मंत्रिमंडल द्वारा दिए इस पहेली को सुलझाने के लिए प्रस्तुत हो गए और शहंशाह अकबर से सिर्फ एक रात  का समय मांगने लगे तभी शहंशाह अकबर ने कहा कि – 

“सोच समझकर सही प्रकार तुम इस पहेली को  सुलझाने में अगर  सफल  होते हो तो हम तुम्हें 100 घोड़े इनाम में देंगे और इसी के साथ पूरे राज्य में यह भी  ऐलान करवाएंगे कि राजा बीरबल जैसा दूसरा बुद्धिमान इंसान हमारे राज्य में नहीं है तुम इस राज्य के इकलौते व्यक्ति बन जाओगे  जिसे बुद्धि के मामले में कोई नहीं हरा पाएगा”

 शहंशाह अकबर ने   सभा खत्म होने के बाद अपने  शयन कक्ष में विश्राम कर रहे थे और काफी रात हो चुकी थी तभी अचानक से उन्हें किसी के कपड़े धोने की आवाज सुनाई दिया

तभी उन्होंने अपने सेवकों से कहकर उस कपड़े धो रहे इंसान को  कपड़े धोना बंद  करने के लिए आदेश भिजवाया और कुछ देर तक कपड़े धोने से जो कंपन पैदा हो रहा था वह बंद हो गया

 कुछ देर बाद फिर से इंसान कपड़े धोने लगा और जिसकी ध्वनि से शहंशाह अकबर और महल के सभी मंत्री दल सो नहीं पा रहे थे शहंशाह अकबर बहुत ही ज्यादा  गुस्सा हो गए थे और अपने सेवक से कहा  की सेनापति को बोलो कि उस कपड़े धो रहे इंसान को पकड़कर हमारे सामने हाजिर करें

 कुछ देर बाद शहंशाह अकबर के सेनापति कपड़े धो रहे इंसान को पकड़कर अकबर के सामने हाजिर करते हैं फिर शहंशाह अकबर बहुत ही क्रोधित होकर उस कपड़े दूर है इंसान से सवाल पूछते हैं कि  ऐसी क्या मजबूरी है तुम्हारी जिसकी वजह से तुम्हें इतनी रात को कपड़े धोना पड़ रहा है 

“मेरे इस सवाल का जवाब अगर तुमने सही तरीके से नहीं दिया तो मैं तुम्हें 1 महीने के लिए काल कोठरी में डाल दूंगा तो जो भी तुम बोलोगी  सच बोलोगे अगर तुमने किसी भी प्रकार का झूठ बोला “

“तो  तुम्हें दंड का पात्र माना  जाएगा और तुम्हें  शहंशाह  और राज्य के सभी लोगों के रात का नींद खराब करने के जुर्म में तुम्हें एक महीने की कालकोठरी का दंड भोगना  पड़ेगा “

दूध देने वाला गधा भाग 4

जो इंसान शहंशाह अकबर के राज्य में रात को कपड़े धो रहा था उसका नाम रमेश था , जब रमेश को  राजा अकबर ने इतनी रात को कपड़े धोने का कारण पूछा तो रमेश कहने लगा

 “शहंशाह मेरी मां  अपने  पिता के घर गई हुई है और  मेरे पिता ने अभी-अभी एक बच्चे को जन्म दिया है इसीलिए मैं घर  के सभी गंदे कपड़े  निकाल कर धोकर साफ कर रहा हूं ”

शहंशाह अकबर रमेश द्वारा दिए उत्तर  को समझ नहीं पाए और रमेश से जाने लगे कि किस तरह एक  इंसान एक बच्चे को जन्म दे सकती है ? शहंशाह चिंतित हो गया

और उससे इस प्रकार के उत्तर का समाधान मांगने लगे तभी रमेश ने शहंशाह अकबर के इस प्रकार के चिंतित हो जाने से  अकबर से कहा कि शहंशाह  आपके राज्य में तो कुछ भी हो सकता है

मैंने सुना है कि आपके राज्य में गधे भी दूध देते हैं और ऐसे गधे को ढूंढने के लिए राजा बीरबल को कहा गया है अगर ऐसा मुमकिन है तो मेरे पिता का बच्चे को जन्म देना और मेरी माता अपने पिता के घर चले जाना क्यों संभव नहीं हो सकता अगर आप अंधविश्वास में मानते हैं तो मैं क्यों अंधविश्वास में नहीं मान सकता 

रमेश द्वारा दिए इस उत्तर से  शहंशाह अकबर बहुत ही जोर जोर से हंसने लगे और उन्हें समझ में आया कि यह संपूर्ण  षड्यंत्र राजा बीरबल द्वारा रची गई है

जिससे हम सभी मंत्रिमंडल  को  अंधविश्वास के जाल से निकाल पाए और एक सटीक ज्ञान की रोशनी प्रदान कर पाए इसी उद्देश्य से राजा बीरबल ने इस प्रकार की नाटक का संरचना किया है

दूध देने वाला गधा भाग 5

 शहंशाह अकबर रमेश द्वारा इस  उत्तर को देने के बाद उसे कहा कि तुम्हें रात को कपड़े धोने के लिए जिस व्यक्ति ने कहा है उसे तुम कहना कि मैं समझ गया कि अंधविश्वास के कुएं में अगर कोई इंसान एक बार चला जाए

तो उसे वापस लौटने में बहुत ही ज्यादा मुश्किलों का सामना करना पड़ता है लेकिन मैं खुशनसीब हूं कि मुझे राजा बीरबल जैसे एक बुद्धिमान और चालाक व्यक्तित्व वाले इंसान मेरे जीवन में मिले

जिनकी वजह से मैं आज  में और मेरे सभी सभासद इस अंधविश्वास के कुचक्र से  निकलने में सफल हो पाए हैं अगले दिन सुबह जब शहंशाह अकबर  के राज्यसभा में राजा बीरबल का अवतरण हुआ 

तब सभी मंत्री  ने दूध देने वाले गधे के बारे में पूछा तभी शहंशाह अकबर राजा बीरबल के पक्ष लेते हुए कहा कि मेरी राज्य में आप से किसी भी प्रकार के अंधविश्वास  की  रीत  नहीं चलेगी

किसी ऐसे गधे को ढूंढ कर निकाल ना जो दूध देता है यह पौराणिक कालों में लोगों द्वारा पुस्तक में लिखी गई एक ऐसी बात है जो किसी भी प्रकार के प्रमाण के बिना ही इतिहास में जीवित है

जिसका किसी भी प्रकार का प्राथमिक अस्तित्व ही नहीं है और हम   ऐसे एक बिना अस्तित्व वाले चीज को राजा बीरबल से ढूंढने की मांग कर रहे हैं जिसका असल जिंदगी में  मिलना नामुमकिन है

और इसे में अंधविश्वास के वर्ग में डालता हूं और पिछले रात हुए इस  घटना के बाद हमारे राज्य में इस प्रकार के अंधविश्वास भरे संदेश  की विस्तार करना  मुगल सल्तनत को  ज्ञान ही करने के समान है

 राजा बीरबल ने  पिछली रात को जिस रमेश नाम के व्यक्ति से कपड़े दिलवा के जोर की ध्वनि उत्पन्न करवाई थी और उसके द्वारा बताए गए  बातों के आधार पर अंधविश्वास  के वर्ग में आने वाले सभी प्रकार के बातों को हमने सुना

जिससे हम इस नतीजे पर पहुंच पाए हैं कि अंधविश्वास जैसे  कुछ अगर की वजह से आज  मेरी सभा दूषित हो चुकी है और हम सभी ने अंधविश्वास को माध्यम बनाकर एक ज्ञानी पुरुष को अपने ज्ञान की परीक्षा देने के लिए मजबूर किया है जिसकी वजह से हम सभी बीरबल के समक्ष शर्मिंदा है

 राजा बीरबल ने इस संपूर्ण नाटक के माध्यम से शहंशाह अकबर और बाकी मंत्री सभासदों को  अंधविश्वास से मुक्त होने का  रास्ता दिखाया और सभी ने इस रास्ते को अपनाया जिससे पूरी सभा बहुत ही ज्यादा खुश हुई

और शहंशाह अकबर ने अपने वचन के मुताबिक राजा बीरबल को 100 घोड़े इनाम में देकर सम्मानित किया और इसी के साथ पूरे मुगल सल्तनत में यह ऐलान करवाया कि राजा बीरबल जैसा बुद्धिमान व्यक्ति हमारे राज्य में दूसरा कोई नहीं है

 

 

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