अकबर-बीरबल के रोचक किस्से

अकबर-बीरबल के रोचक किस्से – स्वागत है आपका  अकबर और बीरबल की एक और नए संस्करण में जिसमें हम ईरान के शहंशाह द्वारा बादशाह को भेजी गई एक चुनौती को किस तरह बीरबल ने बड़ी ही आसानी से हल किया और जिससे बीरबल का नाम पूरे दुनिया में सुनाई दिया इसके बारे में कहानी में हम आपको बताएंगे

बादशाह अकबर ने अपने  द्वारा स्वीकार किए इस चुनौती में ईरान के शहंशाह ने बादशाह अकबर को एक ऐसा  मिट्टी का घड़ा देने के लिए शहंशाह से कहा अकलमंद हो

और इस पहेली  को सुलझाने के लिए ईरान के शहंशाह ने  अपने सबसे खास राजदूत को मुग़ल सल्तनत में  भेजा यह देखने के लिए कि राजा बीरबल किस तरह इस मुश्किल पहेली को हल करते हैं

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अकबर-बीरबल के रोचक किस्से

अकलमंद घड़ा भाग 1

 ईरान के  बादशाह राजा बीरबल से बहुत ही ज्यादा खुश थे क्योंकि ईरान के बादशाह के अनुसार राजा बीरबल जैसा दूसरा कोई उनके राज्य में नहीं है और वे हमेशा ही राजा बीरबल  की परीक्षा लेने के लिए बहुत ही जटिल पहेलियों को बादशाह अकबर के राज्यसभा में भेजते रहते थे

 ईरान के बादशाह और  शहंशाह अकबर में बहुत ही ज्यादा दोस्त थी और राजा बीरबल दोनों के ही बहुत ही ज्यादा प्रिय इंसान थे क्योंकि उनकी बुद्धि की चर्चा करते हुए कोई भी नहीं सकता था और उनकी प्रशंसा करने के पीछे का सबसे बड़ा कारण था उनका ज्ञान क्योंकि उनके ज्ञान के सामने हर एक प्रश्न छोटा ही लगता था

 लेकिन इस बार राजा बीरबल के लिए एक ऐसी पगली आएगी जिस को हल करने के लिए ईरान के बादशाह ने उन्हें 3 महीने का वक्त दिया क्योंकि यह पहेली इतने कम समय में हल करना मुमकिन ही नहीं था और ईरान के राजदूत को भी शहंशाह अकबर के महल में इस पहेली को सुलझाए बिना ईरान लौटने की कोई अनुमति नहीं थी

 ईरान के राजदूत ने राजा बीरबल से कहा कि यह  आपकी ज्ञान की सबसे बड़ी परीक्षा है और ऐसी परीक्षा आपने अपनी जिंदगी में पहले कभी नहीं दिया होगा  ईरान के बादशाह यह चाहते हैं कि आप उन्हें एक ऐसा घड़ा तोहफे में पेश करें जो बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान हो जो अपने अंदर कुछ ऐसी चीज को लेकर बैठी हुई हो जिसको इसके अंदर डालना मुमकिन ही  नहीं है

 राजा बीरबल का कहना है ऐसी कोई भी चीज इस संसार में नहीं है जो  घड़े के आकार से बड़ी चीज को घर के अंदर डालने से मिट्टी का घड़ा टूट  सकता है और ऐसी चुनौती देकर आप हमारे बीरबल को अपमान करने के जैसा बर्ताव कर रहे

 लेकिन राजा बीरबल बहुत ही ज्यादा ज्ञानी पुरुष थे उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार किया और कहा कि मैं 3 महीने के अंदर आपको ऐसी 5 मिट्टी के घड़े दूंगा जो अपने आकार से बड़ी चीज को अपने अंदर डाल सकती है

 राजा बीरबल के द्वारा दिए जुबान की वजह से शहंशाह अकबर चिंता में पड़ गए कि राजा बीरबल का दिया हुआ शान शहंशाह अकबर  के लिए जुबान के समान है क्योंकि शहंशाह अकबर राजा बीरबल का बहुत ही ज्यादा मानते थे और विश्वास करते थे और पूरे राज्य में राजा बीरबल का एक अलग ही प्रभाव था जिसकी वजह से पूरे सभा में एक चिंता का लहर उठ  गया

 क्योंकि अगर राजा बीरबल अपने द्वारा दिए वचन को पूरा करने में असमर्थ रहे तो यह शहंशाह अकबर की तोहीन होगी और राज्य की सम्मान में  क्षति की बहुत शक्ति है और इसी वजह से सभी सभा के मंत्रियों ने शहंशाह अकबर को इस बारे में पुनः सोचने के लिए  मजबूर किया

 क्योंकि सभी मंत्रियों का कहना है कोई भी ऐसा  मिट्टी का घड़ा नहीं बना है जिसके अंदर उसके आकर से बड़ी कोई चीज हम डालकर रख सकते हैं अथवा डाल सकते हैं क्योंकि घड़े का आकार बेशक बड़ा हो सकता है लेकिन  उसके अंदर जाने का रास्ता बहुत ही ज्यादा छोटा है तो कोई भी बड़े चीज  के आकार वाले वस्तु को मिट्टी के घड़े के अंदर डालना नामुमकिन है

 लेकिन राजा बीरबल के लिए कुछ  भी मुश्किल नहीं था और उन्होंने शहंशाह अकबर को विश्वास दिलाते हुए कहा कि मैं आपकी इज्जत को मिट्टी में मिलने नहीं दूंगा आपकी इज्जत मेरी इज्जत है मुझे आप 3 महीने का वक्त दे और ईरान के राजदूत को इस महल में 3 महीने तक रोकने के लिए अनुरोध करें ईरान के राजदूत जब अपने वतन लौट आएंगे तब उन्हें अपने प्रश्नों के उत्तर सही समय पर मिल जाएंगे

अकलमंद घड़ा भाग 2

शहंशाह अकबर ने राजा बीरबल को 3 महीने के लिए राज्य के सभी प्रकार के भार से मुक्त किया और इस चुनौती को पूरा करने के लिए आदेश दिया राजा बीरबल ने शहंशाह अकबर के इस बात को मानते हुए अपने घर लौट गए और इस चुनौती को पूरा करने के लिए  प्रस्तुत होने लगे

 राजा बीरबल एक हफ्ते तक सोचने लगे कि इस पहेली को सुलझाने के लिए  ऐसी एक चीज की आवश्यकता पड़ेगी जो  ऋतु के साथ बड़ी होती है और ऋतु के साथ ही खत्म हो जाती है

और ऐसी ही एक चीज को मिट्टी के घड़े के अंदर हमें डालना होगा जिससे वह ऋतु के अंदर ही बड़े हो जिस ऋतु में इसका जन्म होता है उसी की ऋतु में हमें इस  मिट्टी के अंदर उसे डालना होगा

और ऋतु खत्म होते होते  वह वस्तु  खड़े के अंदर बड़ी होती रहेगी और एक ऐसा समय आएगा जब वह पूरी तरह से बड़ी हो जाएगी लेकिन उसे कलर्स से वापस निकाला नहीं जा सकता

और इसी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए राजा बीरबल ने  एक ऐसी पहेली निकाली जिसकी मदद से राजा बीरबल ईरान के बादशाह को चुनौती देने वाले थे

 उन्होंने सोचा कि मैं इस बुद्धिमान मिट्टी के घड़े के अंदर उस वस्तु को डाल दूंगा और फिर इरान के बादशाह को इसे तोहफे में दूंगा और उसी के साथ एक पहेली भी साथ में दूंगा

की इस घड़ी में डाले गए वस्तु को आप निकाल कर हमें फिर से वापस दीजिए तभी हम मानेंगे कि आपके राज्य में भी हमारे जैसे बुद्धिमान लोग रहते हैं और यह एक चुनौती होगी

 लेकिन फिलहाल राजा बीरबल के लिए एक ऐसी चुनौती खड़ी हो गई थी कि ऐसी चीज को ढूंढना मुश्किल है लेकिन राजा बीरबल ने अपने ज्ञान  के भंडार से

ऐसे वस्तु को निकाला  जो एक सब्जी था  जो एक कद्दू था कद्दू एक ऋतु में ही उठता है कद्दू  जब  छोटा होता है उसे हम किसी भी एक ऐसी चीज के अंदर डालकर रख सकते हैं

जो उसके आकार से बहुत ही ज्यादा बढ़ा है और जब ऋतु के अंतिम दिनों में कद्दू अपने आकार को बड़ा कर रही होगी तब हम उस मिट्टी के घड़े के अंदर से देख सकते हैं

कि वह उस  आकार के साथ खुद को मिला रही होगी और इसी बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए राजा बीरबल ने अपना काम शुरू किया राजा बीरबल ने एक कुम्हार को बुलाया

और उससे  पांच ऐसे मिट्टी के घड़े बनवाए हैं जिनके सिर छोटे हैं लेकिन आकार में बड़े हैं और कुम्हार से यह भी कहा कि तुम इन  मिट्टी के घड़ों को बनाने के बाद

इनके  अंदर मिट्टी की और कद्दू के बीज को भी बोल देना जिससे इसके अंदर ही एक ऐसे कद्दू का उत्पत्ति हो जो इसके आकार के साथ बड़े और एक समय ऐसा आया जब ऋतु खत्म होने वाला हो तब तुम उसे अपनी कद्दू के  पेड़ से तोड़ कर मुझे दे  सको

 कुमार ने अपने द्वारा पांच ऐसे मिट्टी के घड़े बनाए और उन्हें कद्दू के बगीचे में जाकर जहां पर कद्दू के पेड़ लगे हुए थे उनके नीचे गाड़ दिया और कद्दू के बीज बो दिए

जिससे कुछ ही दिनों में कद्दू बड़ा होने लगा और मिट्टी के घड़े का आकार पकड़ने लगा और मिट्टी के घड़े के अंदर ही संपूर्ण तरीके से बैठ गया और ऐसा दृश्य हर एक मिट्टी के घड़े के साथ हुआ जिन्हें कुम्हार ने अपने कद्दू के बगीचे में लगाया था

अकलमंद घड़ा भाग 3

कुछ दिनों के बाद जब मिट्टी के घड़े और कद्दू  में फर्क आने लगा तब कुमार ने उस  मिट्टी के घड़े को राजा बीरबल के सामने प्रस्तुत किया और तभी राजा बीरबल ने देखा कि 

कद्दू का आकार और घड़े का आकार दोनों समान हो चुका है और इसी तरह राजा बीरबल को अपने ज्ञान की सागर से एक ऐसा नया चीज मिला जिसका नाम  उन्होंने अकलमंद घड़ा रखा 

राजा बीरबल बहुत ही ज्यादा खुश थे क्योंकि उन्होंने ईरान के बादशाह द्वारा दिए  पहेली को बहुत ही जल्दी पूरा कर लिया था रितु खत्म होने वाला था इसी वजह से जो  काम 3 महीने में खत्म होने वाला था

वह सिर्फ दो ही महीने में खत्म हो गया और ईरान के राजदूत ने जब  राजा बीरबल को पूछा कि क्या आप इस पहेली को सुलझाने में नाकाम  हो तो मैं अपने वतन लौट सकता हूं

और अगर आप इस पहेली को सुलझाने में सफल हो गए हैं तो कृपया आप इसका उत्तर दीजिए और हमारे ईरान के बादशाह को फिर से अपनी ज्ञान  के तीर से घायल कर दीजिए

शहंशाह अकबर राजा बीरबल के ऊपर बहुत ही ज्यादा आशा लेकर बैठे हुए थे और राजा बीरबल ने  शहंशाह अकबर के इस आशा को टूटने नहीं दिया उन्होंने  ईरान के बादशाह द्वारा भेजे इस पहेली के सवाल को इतनी अच्छी तरीके से हल किया जिसकी कोई सीमा नहीं थी

 अगले ही दिन राजा बीरबल ने पूरे सभा में यह ऐलान किया कि इरान के बादशाह द्वारा भेजे गए इस पहेली  को सफल तरीके से हल कर लिया गया है और मैं बहुत ही जल्द इस पहेली को आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहा हु

  राजा बीरबल ने कुमार द्वारा  बनाए गए मिट्टी के घड़े और उसके द्वारा बोले गए बीच से उड़ने वाले कद्दू जो मिट्टी के घड़े के अंदर था उन्हें शहंशाह के सामने प्रस्तुत करने के लिए आदेश दिया

 कुम्हार ने  पांचों  मिट्टी के घड़े लेकर राज्य सभा में उपस्थित हुआ और ईरान के राजदूत के सामने प्रस्तुत किया ऐसा अकलमंद घड़ा जो अपने अंदर एक कद्दू को लेकर बैठा हुआ था

 ईरान के राजदूत ने अकलमंद घड़े को देख कर ही समझ गया था ऐसे  कारनामे सिर्फ बीरबल ही कर सकते हैं इनके अलावा  इस दुनिया में दूसरा कोई भी उत्पन्न नहीं हुआ जो ऐसे कारनामों को अंजाम दे सकें

 ईरान के राजदूत देखते ही समझ गए थे कि इसका हल सिर्फ और सिर्फ राजा बीरबल ही जान सकते हैं क्योंकि उनके गुरुद्वारा हर एक प्रकार की आकार को किस तरह से के बड़े चीजों के रूप से मिला कर डाला जा सकता है

इसके संपूर्ण रूप का ज्ञान पहले से ही राजा बीरबल के पास था जिस वजह से उन्होंने इस पहेली को बहुत ही जल्द हल करने में सक्षम हो गए राजा बीरबल  के इस पहेली को इतनी आसानी से हल करते एक ईरान के राजदूत ने राजा बीरबल को प्रणाम किया

और कहा कि आपके जैसा ज्ञानी पुरुष मैंने अपने जीवन में दूसरा कोई नहीं देखा खुशनसीब हूं जो मैंने आपके इस पहेली को सुलझा ते हुए आंखों के सामने देख पाया इसके लिए मैं आपका धन्यवाद करता हूं और आपका आभार मानता हूं

अकलमंद घड़ा भाग 4

राजा बीरबल द्वारा सो जाएं इस पहेली को समझ कर इरान के राजदूत अपने वतन लौट गए और उसके बाद शहंशाह अकबर ने  राजा बीरबल को इस पहेली को कैसे सुलझाया इस बारे में जानने की अनुरोध की

 उत्तर में राजा बीरबल ने अपने द्वारा आकार को बड़े या छोटे करने का विशेष रूट के बारे में बताया जिसमें किसी भी आकार को हम सबसे पहले छोटे से शुरु करते हैं किसी अगर वस्तु का आकार छोटा है

अगर  उस वस्तु को भविष्य में हम बड़ा कर सकते हैं किसी भी प्रकार के प्राकृतिक दबाव के मदद से तो हम उस वस्तु को किसी भी मिट्टी के घड़े के अंदर डाल सकते हैं

ताकि ऋतु के परिवर्तन के चलते उस वस्तु में एक ऐसी परिवर्तन आना शुरू हो जाएगा जब वह अपनी अंतिम आकार को धारण करने जाएगी तो मिट्टी के घड़े के आकार से ज्यादा बढ़ नहीं पाएगी

और इसी  बात को ध्यान में रखते हुए मैंने घड़े के अंदर एक ऐसे कद्दू के बीज को बोला जो ऋतु के परिवर्तन के साथ बड़ा होता गया और एक ऐसा समय आया जब यह कद्दू और बड़ा नहीं हो सकता

क्योंकि  घड़े का आकार और कद्दू के आकार के बीच में किसी भी प्रकार का जगह नहीं बचेगा और कद्दू अपने वास्तविक रूप तक ही बढ़ेगा और एक समय आएगा

जब कद्दू अपने आकार को बड़ा करना छोड़ देगा बाहरी बल के प्रयोग की वजह से और इसी तरह में ने ईरान के बादशाह द्वारा पूछे गए इस पहेली को हल किया

 शहंशाह अकबर ने राजा बीरबल द्वारा इतनी अच्छी तरीके से इस पहेली को समझाने की वजह से बहुत ज्यादा खुश हो गए और राजा बीरबल को गले लगा लिया

और बाकी सभी मंत्रियों ने फिर से यह मानने पर मजबूर हो गए कि राजा बीरबल जैसा दूसरा ज्ञानी पुरुष इस संसार में कोई नहीं है क्योंकि राजा बीरबल ने ऐसे 1 को समझाया

जिसके बारे में कोई साधारण इंसान सोच भी नहीं सकता था और इसी वजह से राजा बीरबल मुगल सल्तनत के सबसे बुद्धिमान और  शहंशाह अकबर के नवरत्न  मैं अपना जगह बनाने में सफल हुए||

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