अकबर बीरबल के चुटकुले

अकबर बीरबल के चुटकुले – इस कहानी के माध्यम से अकबर और बीरबल की एक ऐसी गाथा को बताने जा रहे हैं जिसमें शहंशाह अकबर ने  अपने राज्य के गरीब इंसानों पर शहंशाह के सेनापति द्वारा हो रहे अत्याचारों से मुक्ति दिलाने में सफलता हासिल किया जिसमें बीरबल का भी अहम भूमिका दिखाई देता है
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 बीरबल के बिना अकबर  किसी भी प्रकार  के पहेली को आसानी से हल नहीं कर सकते थे बीरबल और अकबर दोनों एक सिक्के के दो पहलू थे जो एक दूसरे से बने थे और एक दूसरे के ऊपर  निर्भर थे |

और इस कहानी में हम देखेंगे कि किस तरह बीरबल ने एक ऐसे मुसाफिर की मदद की जो बादशाह अकबर  से मिलने की आकांक्षा लेकर आया था |

लेकिन बादशाह अकबर के शहंशाह ने उन्हें बादशाह से हासिल हुए तोहफे का हिस्सा  मांगने  के आधार पर उस मुसाफिर को अंदर जाने दिया और अपराध  को करने की वजह से,

सेनापति को ऐसा दंड दिया गया जिसकी वजह से बादशाह अकबर के हर एक सेवक  के दिलों में शहंशाह के  बेशुमार  इज्जत  का इजाफा हुआ ||

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अकबर बीरबल के चुटकुले

अनोखा तोहफा भाग 1

बादशाह अकबर एक बहुत ही दरियादिली इंसान थे वे हमेशा गरीबों की मदद करते थे और हर एक दुखी इंसान और मजबूरी में फंसे इंसान की हर प्रकार से सहायता करने की कोशिश करते हैं और जो इंसान बीमार है उसे बीमारी से ठीक करने से लेकर अपने राज्य में हो रहे हर प्रकार के हिंसा और अन्याय का विचार निष्पक्ष तरीके से करने के लिए शहंशाह अकबर जाने जाते थे

 शहंशाह के राज्य में रमेश नाम का एक व्यक्ति रहता था जो  जो बहुत ही ज्यादा गरीब था और किसी भी प्रकार के काम न मिलने की वजह से अपने परिवार  की जरूरतों को पूरा नहीं कर पा रहा था और इस चिंता में रमेश बीमार हो गया था अपने बीमारी का इलाज करवाने के लिए कुछ धन  की आवश्यकता थी 

 लेकिन उचित मात्रा में धन ना होने की वजह से रमेश बिल्कुल निराश हो गया था और जब किसी भी प्रकार की सहायता उसे नहीं मिली तो उसने शहंशाह अकबर के दरबार में जाना सही समझा

 शहंशाह अकबर के दरबार में एक द्वारपाल था जिसका नाम था  राम सिंह एक बहुत ही ज्यादा लालची इंसान था जो शहंशाह से मिलने आए लोगों से कर वसूल करता था इसके अलावा राम सिंह का कहना था

जो भी शहंशाह से मुलाकात के दौरान शहंशाह द्वारा कोई उपहार या तोहफा मिलता है तो उसका आधा हिस्सा राम सिंह को देना होगा क्योंकि शहंशाह  से मिलने के लिए उसकी अनुमति लेना अनिवार्य था और जिसके बारे में शहंशाह अकबर को या बीरबल  को कोई खबर नहीं थी

 राम सिंह की वजह से शहंशाह अकबर के राज्य में जो गरीब इंसान था वह शहंशाह अकबर से मिलना नामुमकिन जैसा समझता था और इसीलिए अपनी परेशानियों से घिरा रहता था 

और शहंशाह अकबर के पास अर्जी ना पहुंचाने की वजह से कभी कभी गरीब इंसान उस राज्य को छोड़कर भी चला जाता था और जिसके पीछे का सबसे बड़ा हाथ राम सिंह का था

क्योंकि राम सिंह शहंशाह अकबर और गरीब इंसानों के बीच में एक दीवार बनकर खड़ा हुआ था जो किसी को भी शहंशाह अकबर से मिलने के लिए  कर वसूल  करता था

अनोखा तोहफा भाग 2

सुबह का वक्त था रमेश ने शहंशाह अकबर  से मिलने की आस लेकर बादशाह अकबर के दरबार के बाहर खड़ा हो गया जिसमें और भी बहुत सारे लोग थे बाकी दूसरे लोगों की तरह रमेश इतना ज्यादा समृद्ध  नहीं था रमेश एक बहुत ही ज्यादा गरीब और बीमार इंसान था जो शहंशाह अकबर से मिलने के लिए आया था 

 दूसरी और बाकी जो भी लोग शहंशाह अकबर से मिलने आए थे वह बहुत ही ज्यादा अमीर थे और राम सिंह के कहने पर उसे मुंह मांगा कर दे देते थे लेकिन रमेश एक लाचार इंसान था जिसके पास कुछ भी नहीं था

 जब रमेश की दरबार में जाने की बारी आई तब राम सिंह ने उसे कर के बारे में पूछा और कहा

 “”क्या तुम्हारे पास  10 सोने की मुद्राएं है?””

‘’अगर तुम्हारे पास इतने मुद्राएं है तभी मैं तुम्हें अंदर जाने की अनुमति दे सकता हूं’’

 रमेश एक गरीब इंसान था जिसके पास इतनी मुद्राएं नहीं थी और इसी वजह से रमेश  बिना  कुछ उत्तर किए वापस चला गया और सोचने लगा अभी उसकी मदद सिर्फ एक ही इंसान कर सकते हैं

और वह है राजा बीरबल एकमात्र जरिया जो शहंशाह अकबर से मिलने में मदद करेंगे और इसीलिए रमेश ने राजा बीरबल के पास जाना उचित समझा

अनोखा तोहफा भाग 3

 रमेश ने बादशाह अकबर के दरबार में राम सिंह द्वारा  हो रहे अत्याचार के बारे में राजा बीरबल को बताया कि किस तरह राम सिंह गरीब इंसानों को अकबर के पास तो अपनी फरियाद लेकर जाने के लिए रोक रहा है और जिससे पूरा राज्य बहुत ही ज्यादा दुखी है

 शहंशाह अकबर इसीलिए इस राज्य के शहंशाह है क्योंकि वे इस राज्य के हर इंसान के लिए सूची हर एक इंसान के दुख दर्द को समझे और किसी के साथ उनकी मदद करें लेकिन रामसिंह एक ऐसा दीवार बन चुका है जो हर एक इंसान को शहंशाह के पास जाने के लिए रुक रहा है 

  किसी भी इंसान को शहंशाह अकबर के पास जाने से पहले रमेश को 10 सोने मुद्रा देने जो हर किसी गरीब इंसान के लिए संभव नहीं है अगर कोई भी इंसान के पास मुद्राएं होंगी

वह भला शहंशाह अकबर के पास क्यों जाना मुनासिब समझेगा वह उन्हीं 10 मुद्रा में कुछ ना कुछ करके अपनी मुश्किलों से निकल जाएगा लेकिन एक गरीब इंसान के पास खाने के लिए  धन  नहीं है वह कैसे शहंशाह से मिलने के लिए इतनी बड़ी राशि का भुगतान कैसे  कर पाएगा

 राजा बीरबल रमेश की बातों को सुनकर बहुत ही ज्यादा दुखी हो गए क्योंकि राजा बीरबल खुद इस राज्य को प्रभावशाली और शक्तिशाली बनाने के लिए अपने जीवन को समर्पित कर रहे हैं

उसी तरह दूसरी  और  शहंशाह अकबर अपनी जनता को खुश रखने के लिए और सुमन की भलाई के लिए हर प्रकार के संभव कोशिश करते जा रहे हैं

लेकिन राम सिंह जैसे गद्दार की वजह से राज्य में लोग शांति से रह रहे हैं इसका राजा बीरबल को बहुत ही ज्यादा ही नहीं और इसी वजह से राजा बीरबल ने अकबर की तरफ से तरफ से माफी मांगी

और कहा कि मैं तुम्हें एक सुझाव दे रहा तुम इस सुझाव को अपनाओ और जिससे राम सिंह जैसे द्वारपाल  को ऐसा सजा मिलेगा इसके बाद शहंशाह अकबर के दरबार में काम करने वाले किसी भी इंसान के अंदर इस तरह  का लालच फिर से नहीं आएगा

और सभी को सीख मिलेगी ज्यादा लालच इंसान को सर्वनाश की ओर लेकर जाता है और इस काम में “तुम्हें मेरी मदद करनी होगी” रमेश  राजा बीरबल की मदद करने में अपनी सहमति दी और कहा की – 

मैं एक गरीब इंसान हूं मैं आपकी क्या मदद कर सकता हूं लेकिन  अगर आपको लगता है कि  मैं आपकी मदद के लायक हूं तो मैं आपको अपनी संपूर्ण शक्ति के साथ राम सिंह जैसे गद्दार इंसान को सबक सिखाने में आपकी  संपूर्ण रुप से मदद करूंगा ”

अनोखा तोहफा भाग 4

अगले दिन सुबह  रमेश  फिर से राजा बीरबल  द्वारा सुझाए बुद्धि को आसमानी के लिए शहंशाह के दरबार के सामने जाकर खड़ा हो गया और रमेश को खड़ा देखकर राम सिंह ने फिर से कहा कि क्या तुम आज 10 मुद्राएं लेकर भाई अगर तुम्हारे पास 10  मुद्राएं  पूरे है तभी तुम अंदर जा सकते हो

  रमेश ने राम सिंह के उत्तर में कहा कि मैं एक गरीब इंसान हूं शहंशाह अकबर ने मेरे पास एक  सेवक के हाथों  पैगाम भिजवाया था कि  अकबर मुझे कुछ  तोहफे के रुप में देने वाले है

 राम सिंह ने कहा देखो तुम्हारे पास 10 मुद्राएं नहीं है फिर भी मैं तुम्हें अंदर जाने दूंगा लेकिन मेरी एक शर्त है  तुम्हें अंदर जो भी  तोहफा मिलता है उसका आधा हिस्सा मुझे देना होगा

 रमेश ने कहा आप मुझे अंदर जाने की अनुमति दे मुझे अंदर जो भी तोहफा मिलेगा मैं आपको उसका आधा हिस्सा दे दूंगा लेकिन मेरा अंदर जाना बहुत ही ज्यादा जरूरी है अगर आपने मुझे यहां रुका तो शहंशाह आपके ऊपर नाराज हो जाएंगे और आपको सजा दे देंगे

 राम सिंह ने देर न करते हुए रमेश को  अंदर जाने दिया रात सभा में रमेश जैसे ही शहंशाह अकबर  से मिले सबसे पहले रमेश ने शहंशाह अकबर को प्रणाम किया और कहा शहंशाह में बहुत ही दूर से आया हूं मैं  आप ही के राज्य में रहने वाला एक सामान्य इंसान हो मैं बहुत ही ज्यादा बीमार हूं लेकिन आप के दरबार तक पहुंचने के लिए मुझे बहुत सारी परेशानियों का सामना करना पड़ा

 शहंशाह अकबर ने जैसे ही इस बात को सुना तो वह दंग रह गए क्योंकि शहंशाह का मानना है कि उनसे मिलने के लिए किसी भी प्रकार  का बाधा उन्हें नहीं रोक सकता अकबर का दरबार सभी के लिए दिन-रात हमेशा के लिए खुला हुआ है जब भी किसी को मदद की पुकार पड़ेगी शहंशाह पर उसके लिए हमेशा खड़े रहेंगे

 लेकिन रमेश  का कहना है कि ऐसा अगर होता तो इस राज्य में भी इंसान दुखी नहीं होता  शहंशाह अकबर मेरे जैसे बहुत सारे गरीब लोग हैं जो आपसे मिलना चाहते हैं

लेकिन  आपसे मिलने के लिए के द्वारपालों को खास करके राम सिंह को 10 सोने की मुद्राएं देनी पड़ती है  जो एक साधारण गरीब इंसान देने में सक्षम नहीं है अभी आप ही बताएं कि तरह मैं आप तक पहुंच सकता था

मैं धन्य हो राजा बीरबल का जिन्होंने मुझे  ऐसी एक तरकीब  बताया जिसकी वजह से मैं आज आपके सामने खड़ा हूं लेकिन हर कोई गरीब इंसान जरा आपके सामने खड़ा नहीं हो सकता क्योंकि उसे आप तक पहुंचने के लिए  10 मुद्रा कर देना पड़ेगा

शहंशाह के दरबार तक पहुंचने के लिए इस तरह के  तरकीब का इस्तेमाल किया जिसमें बीरबल ने आपकी मदद की है उसके बारे में जानना चाहा

अनोखा तोहफा भाग 5

रमेश ने  अपने और राम सिंह के बीच हुए तोहफे के आधे हिस्से को देने की वचन को शहंशाह अकबर के सामने प्रस्तुत किया  शहंशाह अकबर ने रमेश से तोहफे के बारे में पूछा कि तुम्हें किस प्रकार  का तोहफा चाहिए

तभी रमेश ने कहा मुझे आप सौ  कोड़े तोहफे में दीजिए ऐसे में  आधा हिस्सा राम सिंह को दे सकूं क्योंकि मैंने उससे वादा किया है मेरे द्वारा प्राप्त किए गए तोहफे में से मैं उसे आधा हिस्सा दे दूंगा

रमेश की इन बातों को सुनकर शहंशाह अकबर बहुत ही ज्यादा दुखी हो गए क्योंकि  वे हमेशा हर एक इंसान की मदद करते थे और हमेशा चाहते थे कि उनकी मदद से हर एक इंसान बहुत ही ज्यादा खुश रहे

और मुगल सल्तनत का नाम ऊंचा रहे लेकिन राम सिंह जैसे द्वारपाल की वजह से आप मुगल सल्तनत का नाम फिर से नीचा हो गया और इसकी वजह से शहंशाह अकबर बहुत ही ज्यादा नाराज हो गए

शहंशाह अकबर ने राम सिंह को  बुलाया और कहा कि इस गरीब इंसान की अरदास है कि यह अपने तोहफे का आधा हिस्सा तुम्हें देना चाहता है क्या तुम इस के तोहफे काम आधा हिस्सा लेने के  लिए तैयार हो?

शहंशाह अकबर की इस बात को सुनकर राम सिंह ने कहा कि हो सकता है कि मेरे द्वारा जो सेवा और प्यार मैंने दिया है इसके लिए यह खुश होकर मुझे अपने तोहफे का आधा हिस्सा देना चाहता है

मैं खुशनसीब हूं कि ऐसा एक गरीब इंसान मुझे अपने तोहफे का आधा हिस्सा दे रहा है और मैं इसे खुशी  से लेना पसंद करूंगा शहंशाह अकबर ने कहा

इस ने तोहफे में  अपने लिए एक ऐसी चीज मांगी है जो मैं किसी और को दे भी नहीं सकता इस तोहफे के काबिल सिर्फ तुम ही हो की है मैंने निश्चय किया है कि मैं रमेश के तोहफे का पूरा का पूरा हिस्सा तुम्हें देना चाहता हूं क्या तुम रमेश के पूरे तोहफे का हिस्सा लेना चाहोगे?

अनोखा तोहफा भाग 6

राम सिंह ने कहा कि अगर आप ऐसा समझते हैं कि मैं इस के तोहफे का हकदार हूं तो आप मुझे दे सकते हैं क्योंकि मैं  किसी के तोहफे को जबरदस्ती लेना नहीं चाहता लेकिन अगर आप चाहते हैं कि यह तोहफा मुझे मिले तो मैं इसके लिए तैयार हूं

शहंशाह अकबर ने कहा क्या तुम जानना चाहते हो कि इस गरीब इंसान ने अपने तोहफे में क्या मांगा है  तभी राम सिंह ने तोहफे में क्या मिलने वाला है इसके बारे में  पूछा

तभी शहंशाह ने राम सिंह को सौ कोड़े मारने के लिए अपने सेनापति को कहा क्योंकि रमेश की इच्छा थी उसे सौ कोड़े उपहार के रूप में दिए जाएं

 राम सिंह रमेश के द्वारा मांगे गए इस तोहफे को सुनकर डर गया और शहंशाह अकबर से माफी मांगने लगा और कहा कि मैं तो कूड़े को अगर अपने बदन में लेता हूं तो

मैं जिंदा नहीं बचेगा यह आप भी जानते हैं और रमेश भी जानता है लेकिन इसके बावजूद आपने इस प्रकार के तोहफे  को देने के लिए मंजूरी क्यों दी मैं यह जानना चाहता हूं

शहंशाह अकबर ने गुस्से से राम सिंह की ओर देखा और कहा रमेश की जगह अगर मैं होता तो खुद के लिए मौत की सजा मांगता क्योंकि तुम जैसे गद्दार के लिए मौत की सजा भी कम होगी क्योंकि तुम गरीब इंसानों को मेरे पास आने से रोक रहे हो जिससे बड़ी गलती इस राज्य में और कोई दूसरी नहीं है

फिर भी रमेश एक दरिया दिल इंसान है जिसने सिर्फ तुम्हारे लिए सौ कोड़े का तोहफा मांगा है अगर मैं होता तो तुम्हारे लिए मौत की सजा मांगता

अनोखा तोहफा भाग 7

 राम सिंह अपने द्वारा हुए गलती को समझ गया और शहंशाह अकबर से माफी मांगने लगा और कहने लगा कि मुझसे बहुत बड़ी भूल हो गई कि मैंने गरीब इंसानों को आपके पास पहुंचने  मैं रुका जो  बहुत ही बड़ा अपराध है

इस अपराध का कोई समान नहीं है लेकिन मैं आपसे  इतना ही  निवेदन कर सकता हूं कि आने वाले समय में ऐसा कोई भी  गरीब आप के दरबार से खाली हाथ नहीं लौटेगा

यह मेरा आपसे वादा है मैंने रमेश से बहुत  ही ज्यादा अभद्र भाषा में बात किया मैं लोगों को हैसियत के आधार पर बोलने लगा था और जिस वजह से सभी लोग आपसे मेरी वजह से नाराज हो रहे थे

जिसकी कोई सीमा नहीं है मैं इन सभी अपराधों के लिए आपसे क्षमा मांगता हूं और मैं अपने आप को सुधारने का एक और मौका आपसे चाहता हूं

और मैं यह प्रमाण करके दिखाऊंगा की शहंशाह अकबर के दरबार में काम करने वाले हर एक इंसान शहंशाह के लिए कितने ज्यादा ईमानदार और वफादार है

 राम सिंह की इस बातों को सुनकर रमेश ने शहंशाह अकबर को माफ कर देने के लिए अनुरोध किया और शहंशाह अकबर ने रमेश की बात को सुनकर राम सिंह को फिर से एक मौका देने का सोचा

और उसके बाद से राम सिंह ने अपने वफादारी का सच्चा उदाहरण सभी के सामने प्रस्तुत किया वह हर एक गरीब को बहुत ही इज्जत के साथ शहंशाह अकबर के पास लेकर आने लगा

और पूरे राज्य में हर एक गरीब की  सभी प्रकार की परेशानी बढ़ने लगी क्योंकि अभी शहंशाह और जनता के बीच में किसी भी प्रकार का दीवार नहीं था

जो पहले दीवार था वह भी अपने आप को शहंशाह के सेवा में पूरी तरीके से निछावर कर दिया था और  जिसकी वजह से मुगल सल्तनत और भी ज्यादा खुशहाल  होने लगा

 

 

 

 

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