अकबर बीरबल की मजेदार पहेलियां

अकबर बीरबल की मजेदार पहेलियां – स्वागत है आपका हमारे एक और ब्लॉग पोस्ट में इस ब्लॉग पोस्ट में हम अकबर और बीरबल की सबसे बड़ी एक बेवकूफी  से भरी एक कहानी आपके सामने प्रस्तुत करने जा रहे हैं

इस कहानी को सुनने के बाद आप अकबर और बीरबल द्वारा  अपने राज्य से निकाले हुए ऐसे पांच मूर्ख जिन्हें इंसान कहना भी गलत होगा जिनके ऊपर यह कहानी आधारित है

कहानी के माध्यम से हम  समाज के मूर्ख लोगों  के बारे में विस्तार से चर्चा करेंगे और इसमें बीरबल और अकबर का एक बड़ा भूमिका देखा गया क्योंकि इस कहानी में  बीरबल और अकबर ने मिलकर इन मूर्खों को ढूंढा है

क्योंकि शहंशाह अकबर देखना चाहते थे कि उनके राज्य में प्रतिमान लोगों की संख्या बहुत ज्यादा है लेकिन मूर्खों की संख्या  कितने हैं इस प्रश्न का उत्तर जानने के लिए उन्होंने बीरबल को अपने पूरे राज्य में सबसे ज्यादा  इंसानों को ढूंढने का हुक्म दिया

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अकबर बीरबल की मजेदार पहेलियां

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 शहंशाह अकबर अपने राज्य को शक्तिशाली और प्रभावशाली बनाने के लिए दुनिया की हर एक कोने से बुद्धिमान व्यक्तियों को ढूंढ ढूंढ कर निकाला जिससे वे अपने मुग़ल सल्तनत को एक अलग ही मुकाम पर पहुंचा सके

इस काम में सबसे ज्यादा शहंशाह की मदद करने वाले इंसान थे राजा बीरबल की कि राजा बीरबल  शहंशाह अकबर  के नवरत्नों में से एक ऐसे रत्न थे जो अमूल्य था

जिसकी बुद्धि की मिसाल पूरी दुनिया में दी जाती थी हर एक ही राज्य के शहंशाह बीरबल के कारनामों के बारे में जानते थे और उनकी हर एक कारनामों की प्रशंसा करते थे उनकी बुद्धि इतनी ज्यादा तेज थी कि वे नामुमकिन दिखने वाले हर एक प्रश्न को भी बहुत ही सरल तरीके से सुलझा लेते थे

शहंशाह अकबर के राज्य में रहने वाले राजा बीरबल जिनका नाम ही स्थान स्थान ईरान से  लेकर   अरब देश के शहंशाह सभी ने बीरबल की प्रशंसा की

उनके द्वारा भेजे गए हर एक पहेली को इतनी आसानी से हल किया कि कोई भी इस तरह हल करने के बारे में सोच भी नहीं सकता जहां पर बड़े-बड़े दिक्कत लोग हार मान जाते थे वहां पर बीरबल की एक छोटी सी  चालाकी हाथी जैसे मुसीबत को भी  मात देती थी

लेकिन इस बार शहंशाह अकबर ने कुछ अलग ही सोचा शहंशाह  का राज्य इतना बड़ा धाम किस राज्य में हर एक वर्ग के लोग रहते थे और हर एक वर्ग के लोग में सभी प्रकार की मूर्ख

और चालाक दोनों व्यक्ति रहते थे चालाक व्यक्ति अपनी बुद्धि की मदद से अपने आप को  सफल बनाता था उसी दौर एक मूर्ख व्यक्ति  शुन्य ज्ञान की वजह से अपने आप को कभी भी सुधार नहीं पाता था

और इसी बात को सोचते हुए शहंशाह अकबर ने सोचा कि वे अपने राज्य में रहने वाले सभी मूर्ख व्यक्ति को बीरबल की तरह बुद्धिमान बनाएंगे और उनसे अपने भविष्य  में अपने राज्य में बीरबल की तरह ही एक मंत्री के पद पर ध्यान देंगे

राज्य के मंत्री के पद पर उन्हें ध्यान देंगे अगर वे अपने  द्वारा ग्रहण किए गए ज्ञान को सटीक तरीके से इस्तेमाल करके है कि परीक्षा  में सफल हो पाते हैं तब वे संपूर्ण तरह शहंशाह के दरबार के मंत्री  होने  के लिए योग्य पुरुष माना जाएगा

जिस तरह शहंशाह अकबर ने राजा बीरबल के लिए सोचा था उसी प्रकार का एक दूरदर्शी सोच अपने राज्य के मूर्खों के लिए भी सोचना शुरू कर दिया था क्योंकि शहंशाह अकबर का मानना है

जिनके अंदर ज्ञान की कमी है वही ज्ञान को अर्जित कर के जीवन में कुछ सही कर सकते थे लेकिन जो  पहले ही चालाक है जिसने ज्ञान का भंडार है वह खुद के बारे में ही सोचेगा

और अगर एक मूर्ख इंसान को लेकर उसे शुरुआत से लेकर अंतिम समय तक ज्ञान दिया जाए तो वह हमेशा वफादार रहेगा और इसी सोच को पढ़ाते हुए शहंशाह अकबर ने राजा बीरबल को अपने राज्य के सबसे 5 मूर्ख इंसान को ढूंढ के उनके सामने प्रस्तुत करने के लिए हुकुम जारी किया

मूर्खों की टोली भाग 2

राजा बीरबल बहुत ही ज्यादा दूरदर्शी थे और बुद्धिमान भी थे उन्हें  पहले से ही इस बात का ज्ञान था कि इस प्रकार के मूर्ख को ढूंढना खुद एक मूर्ख बने जैसा है

क्योंकि मूर्ख इंसान को एक समय तक ही ठीक किया जा सकता है , किसी भी मूर्ख इंसान को ज्ञानी बनाने के लिए समय का सबसे बड़ा भूमिका रहता है  लेकिन शहंशाह अकबर को इस बात को समझाने से अच्छा असलियत में करके दिखाना  अच्छा रहेगा ऐसा सोच राजा बीरबल का था

 और  शहंशाह अकबर के हुकुम को मानते हुए राजा बीरबल ने अपने राज्य के पांच ऐसे मूर्ख व्यक्ति को ढूंढने का निश्चय किया जो अपने आपके परिजनों को भी अच्छी तरीके से लोगों के समय प्रस्तुत ना कर पाते हो

और शहंशाह अकबर ने इस काम के लिए राजा बीरबल को 3 महीने का समय दिया लेकिन राजा बीरबल ने कहा  कि मैं  ऐसे लोगों को बहुत ही जल्द ढूंढ सकता हूं

क्योंकि एक ज्ञानी पुरुष के लिए मूर्ख इंसान को ढूंढा कोई बड़ी बात नहीं है ज्ञानी पुरुष हर एक बात को अच्छी तरीके से समझ सकता है लेकिन इतना सक्षम नहीं होता कि ज्ञान की हर बात को रख सके लेकिन एक ज्ञानी पुरुष ऐसा करने में संपूर्ण तरीके से सक्षम है

 शहंशाह अकबर द्वारा जारी की गई इस काम को पूरा करने के लिए राजा बीरबल ने अगले सुबह से अपने घोड़े में सवार होकर राज्य के हर एक दिशा में निकल पड़े

और कुछ देर जाने के बाद उन्हें एक ऐसा इंसान मिला जो अपने खुद के ही आवाज को सुनने के लिए दौड़ रहा था जब उन्होंने उस इंसान को रोका तब उस इंसान ने गुस्से में राजा बीरबल को कहा कि आपने मेरा बहुत बड़ा नुकसान कर दिया  है

 तब राजा बीरबल ने उत्तर में कहा कि मैंने ऐसा क्या तुम्हारा नुकसान किया है जिससे तुम इतना ज्यादा क्रोधित हो मेरे ऊपर कभी उस इंसान ने कहा कि मैं अपने आवाज को सुन रहा था

और मैं देख रहा था कि मेरा आवाज कहां तक जा सकता है मैं पिछले 10 दिनों से इस आवाज के पीछे घूम रहा हूं मैं यह जानना चाहता हूं कि इस आवाज के पीछे कौन है और इस आवाज को किस तरह से पकड़ा जा सकता है

राजा बीरबल उस इंसान की बातों को सुनकर हंसने लगे  और मन ही मन कहने लगे की आवाज को कभी भी पकड़ा नहीं जा  सकता है और खास करके अपने खुद के आवास को क्योंकि खुद का आवाज अपने साथ ही चलता है और उसे कभी  भी हम पकड़ नहीं सकते  है

मूर्खों की टोली भाग 3

राजा बीरबल के मुताबिक  यह इंसान अपनी जिंदगी के उस मोड़ पर खड़ा हुआ है जहां पर  ज्ञान का स्थान सुननी है और ऐसे इंसान को मूर्ख के अलावा कुछ कहा नहीं जा सकता

और इसी तरह राजा बीरबल ने अपने सबसे पहले मूर्ख को ढूंढने में सफल हो गए, बीरबल ने कहा मैं तुम्हारी इस पहेली को सुलझाने में तुम्हारी मदद करूंगा

लेकिन उसके लिए तुम्हें मेरे साथ चलना होगा तुम जैसे और चार ऐसे लोगों को मैं ढूंढने जा रहा हूं जो  तुम्हें तुम्हारी इस आवाज को ढूंढने में मदद करेंगे

 कुछ देर चलने के बाद राजा बीरबल  ने देखा एक इंसान जो एक कलश का रूप लेकर खड़ा हुआ है राजा बीरबल ने के पास जाकर पूछा कि आप ऐसे क्यों खड़े हुए हैं

तब उस इंसान ने कहा कि मेरी पत्नी ने कलश खरीदने का सोचा है और उसका आकार में फिलहाल जिस तरह खड़ा हुआ हूं  इस प्रकार का है मैं कलर्स का आकार भूल ना जाऊं

इसलिए इस प्रकार के रूप लेकर  खड़ा हुआ हूं ताकि जब भी कोई कलर बेचने वाला इंसान मेरे पास से गुजरे तो मैं उसको इस  रूप को दिखा के बता सकूं मुझे इस प्रकार का कलश चाहिए

 राजा बीरबल ने फिर से अपने दिमाग में सोचने लगे कि कोई भी एक कल इसको खरीदने के लिए  कलर्स का रूप लेना जरूरी नहीं है इसे हम अपने हाथों के आकार से भी उस इंसान को समझा सकते हैं

जो कलश को बेच रहा है तब राजा बीरबल को एहसास हुआ कि इस प्रकार के इंसान के लिए ज्ञान की कोई परिभाषा नहीं है यह खुद एक बहुत ही बड़ा मूर्ख है और इसी तरह से राजा बीरबल ने अपने दूसरे मूर्ख व्यक्ति को ढूंढने में सफलता हासिल की

 कुछ देर चलने के बाद फिर से राजा बीरबल को  ऐसे दो इंसान मिले जो एक दूसरे के साथ झगड़ा कर रहे थे राजा बीरबल ने उनसे जाकर झगड़ा करने का कारण पूछा 

 दोनों में से एक का नाम विजय था और दूसरे का  विष्णु  था, विजय विष्णु दोनों ही सगे भाई थे जिसमें विजय बड़ा भाई था और विश्व छोटा भाई था विजय का कहना है

कि मैं भगवान से एक गाय मांग रहा हूं जिसको मैं पालकर बड़ा करके उसका दूध बेच कर अपने घर  की देखभाल में मदद करना चाहता हूं और दूसरी और विष्णु कह रहा है कि

मैं एक शेर को पालना चाहता हूं जिसे  मैं गांव वालों को दिखाकर कुछ पैसे कमा कर अपनी खुद की चाहते पूरा कर सकूं

 लेकिन विजय का कहना है कि जब भी मेरी गाय आएगी वह उसे अपने  शेर से शिकार करवाकर उसे मार डालेगा और इसी बात पर हम दोनों झगड़ा कर रहे हैं

 बीरबल मन में सोचने लगे की कोई भी ऐसे तो जानवर को यह लोग क्यों मांग रहे हैं जो भगवान दे सके किसी भी जानवर को  पाने के लिए मेहनत करना पड़ता है

परिश्रम के माध्यम से पैसा कमा कर उसे खरीदना पड़ता है लेकिन भगवान के भरोसे किसी भी  जानवर  मिलता उतना ही मुश्किल है जितना सूखे कुएं में पानी को ढूंढना अथवा रेगिस्तान में पानी की तलाश में भटकते रहे हैं जो कभी नहीं मिलने वाला और इसी तरह राजा बीरबल को अपने द्वारा ढूंढने गए चार मूर्ख मिलते हैं

मूर्खों की टोली भाग 4

राजा बीरबल ने  अपने राज्य के चार मूर्खों को ढूंढने में सफल हो गए और चारों को लेकर अगले सुबह शहंशाह अकबर के दरबार में जाकर प्रस्तुत हो गए शहंशाह अकबर ने पूछा

राजा बीरबल हमने आपको पांच मूर्ख ढूंढने के लिए कहा है लेकिन आपने यहां तो चार मूर्ति ढूंढ के लाए बाकी का एक कहा गया तब उत्तर में राजा बीरबल ने कहा

महाराज में चार नहीं बल्कि 6 ऐसे मूर्ख को ढूंढ के लाया हूं जो इस राज्य के सबसे बड़े मूर्ख है जिनके सामने हर एक ज्ञान की बात शून्य के बराबर है इसका कोई अर्थ नहीं है

  तभी शहंशाह अकबर ने बाकी दो मूर्खों के बारे में  जानने  के लिए राजा बीरबल से आग्रह किया तब जाकर राजा बीरबल ने कहा पांचवा मूर्ख आप खुद है और  छटा मूर्ख मैं खुद हूं

क्योंकि मैं एक ऐसे काम को करने जा रहा था जिसका कल मुझे पहले से ही पता था और आपने  एक ऐसे हुकुम को करने के लिए जारी किया है जिसका कोई अर्थ ही नहीं है कि कि मूर्ख को ढूंढना एक मूर्खता है और इसी वजह से मैं  अपने आप को और आप  बादशाह अकबर को पांचवां और छठा मूर्ख कहना सही समझूंगा

 शहंशाह अकबर हंसने लगे और सोचा कि यदि मूर्ख को ढूंढना सच में ही एक समझदारी वाला काम नहीं है क्योंकि इस समय को नष्ट करना ही इस तरह के कानून मूर्खता है, ज्ञान को प्राप्त करने की कोई समय सीमा नहीं होती है

लेकिन सही समय में ज्ञान को प्राप्त करना सबसे ज्यादा बुद्धिमान का काम होता है और इस काम में जो व्यक्ति असफल रहता है वही  इंसान सारी जिंदगी मूर्ख का परिचय देता रहता है और राजा बीरबल  तुमने आसान बात को समझाने के लिए हमारे सामने जो उदाहरण प्रस्तुत किया है उसके लिए हम तुम्हारे शुक्रगुजार हैं

 

मूर्खों की टोली भाग 5

राजा बीरबल ने चारों इंसानों को अपने द्वारा किए गलतियों के बारे में समझाया सबसे पहले उस इंसान को समझाया जो अपने आवास के पीछे दौड़ रहा था उसे बताया कि आवाज एक ऐसी चीज है

जिसे इस दुनिया का कोई भी इंसान पकड़ नहीं सकता यह एक ऐसी चीज है जिसे हम सिर्फ महसूस कर सकते हैं इसके अलावा इसका कोई दूसरा रूप नहीं है लेकिन तुम ऐसे एक चीज के पीछे भाग रहे हो

जिसे इस दुनिया का कोई भी इंसान देख नहीं सकता इस आवाज को ढूंढने के लिए तुमने अपने जिंदगी के बहुत सारा समय बर्बाद कर दिया है तब जाकर उस इंसान को समझ में आया कि आवाज को कोई नहीं पकड़ सकता

 उसी तरह राजा बीरबल ने दूसरे इंसान को कलर्स के बारे में समझाया कहा कि कल इसके लिए किसी भी प्रकार का रूप बनाकर खड़ा रहना बुद्धिमानी नहीं है

क्योंकि क्लेश  का रूप आप अपने हाथों से ही बनाकर उस इंसान को दिखा सकते हो कि आपको किस प्रकार के कलश की जरूरत है इसके लिए आपको कल इसका रूप बनाकर खड़ा रहना मूर्खता है और  तभी उस इंसान को भी अपने द्वारा किए इस गलती के बारे में समझ में आया

 उसी तरह तीसरे और चौथे  मूर्खों को भी यह समझाया कि गाय और शेर दोनों ही जानवर है और इन्हें प्राप्त करने के लिए मेहनत करना पड़ता है मेहनत करके तुमको जो पैसा मिलेगा

उस पैसों से तुम किसी भी प्रकार के जानवर को खरीद सकते हो लेकिन भगवान के भरोसे अगर बैठे रहे तो भगवान तुम्हें कभी भी  जानवर नहीं देंगे क्योंकि किसी भी एक वस्तु को प्राप्त करने के लिए उसके मूल्य को चुकाना  पड़ता है

हर एक वस्तु का एक अलग ही मूल्य होता है जिस मूल्य को चुकाए बिना तुम उस वस्तु को प्राप्त नहीं कर सकते और  फिर दोनों ने इस बात को समझा और एहसास हुआ कि वे बहुत ही छोटी सी चीज के लिए लड़ रहे थे

 और इसी तरह राजा बीरबल ने चारों मूर्ख को अपनी अपनी गलतियों के बारे में एहसास करवाया और चारों को बताया कि ज्ञान एक ऐसी चीज है जिसे तुम जितना जल्दी हो सके ग्रहण करना सीख जाओ

इसी में तुम सब की भलाई है बिना ज्ञान की इंसान एक लाचार व्यक्ति जैसा है जिसके हाथ पैर टूटे हुए हो और एक ज्ञान से भरा हुआ इंसान क्षत्रिय जैसा है जिसे किसी भी दुश्मन से भाई ने की है क्योंकि उसके पास ज्ञान नाम का अस्त्र होता है जिसकी मदद से वह हमेशा किसी भी युद्ध के लिए तैयार रहता है

 

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