अकबर बीरबल की तीन कहानी

अकबर बीरबल की तीन कहानीस्वागत है आपका हमारे एक और नए संस्करण में जिसमें हम अकबर और बीरबल के तीन ऐसी कहानियों को विस्तारित चर्चा करेंगे आपको ज्ञान विवेक बुद्धि और शक्ति का  ऐसा मिश्रा देखने को मिलेगा |

जिसमें बीरबल ने अपने बुद्धि और ज्ञान के माध्यम से अचानक पर सभी प्रकार के मुसीबतों से बचाया तथा अपने द्वारा प्रधान की ज्ञान के आधार पर बादशाह पर को सभी प्रकार की  परेशान कर देने वाली चिंताओं से मुक्त किया |

 इन तीन कहानियों के माध्यम से हम समाज में यही संदेश पहुंचाने की कोशिश करेंगे समाज में बीरबल और अकबर जैसे लोगों की जरूरत है क्योंकि ऐसे ही लोग इस भारतवर्ष को फिर से सोने की चिड़िया बना सकते हैं ||

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अकबर बीरबल की तीन कहानी

चालाक नाई भाग 1

बादशाह अकबर अपने नाम और कर्मों से इतने ज्यादा पसंद हो गए थे उनके राज्य में उनके हर एक आदेश का बहुत ही ज्यादा सम्मान से पालन किया जाता था और जनता बहुत ही ज्यादा खुशहाल जिंदगी  जी रही थी |

लेकिन शहंशाह अकबर के राज्य में कुछ ऐसे भी लोग थे जो बादशाह अकबर को मुगल सल्तनत के बारिश के रूप में देखते थे अपने परदादा और से मिली शोहरत के दम पर बादशाह अकबर राज कर रहे हैं ऐसा कुछ लोगों का मानना था ||

पर ऐसा बिल्कुल नहीं था क्योंकि बादशाह अकबर ने अपने शौर्य और शक्ति से अपना नाम बनाया था और कुछ भारतीयों को  लगता था कि वे दूसरे देश से  आए और भारत को कब्जा कर के बैठे हुए हैं |

इस तरह की बातों से बादशाह अकबर को बुरा नहीं लगता क्योंकि उन्हें भी पता था कि कुछ लोग उनके बारे में अच्छा ही सोच सकते और उनका अच्छा नहीं कर सकते ||

उनकी कुछ दुश्मन थे जिन दुश्मनों ने कुछ गुप्तचर बादशाह अकबर के महल में तैनात करके रखा हुआ था क्योंकि फिर बादशाह अकबर के हर एक गतिविधि पर ध्यान रखते थे ||

और इसी गतिविधियों को देखने के लिए बादशाह के एक दुश्मन ने  अपनी एक गुप्तचर को  नाई बनाकर  बादशाह अकबर के राज्य में भेज दिया जिस बात का पता बीरबल को बहुत ही देर से लगी ||

चालाक नाई भाग 2

बादशाह अकबर के दुश्मनों को पता था कि अगर अकबर की कोई कमजोरी है तो वह बीरबल है क्योंकि एक अकेला बीरबल ही है जो पूरे राज्य के हर प्रकार की गतिविधियों को तथा सेना और बादशाह की सुरक्षा के लिए जितने भी प्रकार की निर्णय लेने होते हैं उसका सटीक  सुझाव बादशाह को प्रदान करते हैं ||

और बिना बीरबल को अपने रास्ते से हटाए बादशाह अकबर का कुछ भी करना संभव नहीं है और इसीलिए बादशाह अकबर  के परम मित्र राजा बीरबल को मारने के लिए उनके दुश्मनों ने एक अंधविश्वास का षड्यंत्र रचा |

दुश्मनों का एक गुप्तचर जिसका नाम भीमा था वह पेशे में एक नाई था ,और बादशाह अकबर की राज्य में कई सालों से रह रहा था ,एक दिन की बात है जब बादशाह  अकबर को अपने बाल को कटवाने थी इसी वजह से  बादशाह का एक  भीमा को लेकर गया

भीमा एक बहुत ही चालाक इंसान था जिसे पता था कि बादशाह अकबर और महारानी जोधा दोनों ही भगवान में बहुत ज्यादा मानते थे और इसके अलावा अंधविश्वास में भी थोड़ी मान्यता रखते हैं |

चालाक नाई भाग 3

भीमाने बादशाह अकबर के सभी प्रकार की भावनाओं को ठेस पहुंचाने के लिए तथा राजा बीरबल  को हमेशा के लिए मौत के घाट उतारने के लिए एक षड्यंत्र रचा जो एक बुद्धि का जाल था और भीमा को पता था कि राजा बीरबल  बुद्धि के जाल में फंस जाएंगे

 भीमाने बादशाह अकबर के बाल काटते हेतु उनके कक्ष में बैठ गया और बादशाह अकबर के बाल को काटने लगा तभी बादशाह अकबर से कहने लगा शहंशाह आप एक बहुत ही प्रभावशाली राजा है

और आप हमेशा अपने सारे प्रभाव की देखभाल करते हैं तथा उन्हें बहुत ही खुश रखने की कोशिश करते हैं लेकिन क्या कभी आपने ऐसा सोचा है कि आपके पूर्वज जो आपको छोड़कर बहुत पहले जा चुके हैं आपके माता-पिता तथा आपके दादा कैसे हैं 

क्या कभी आपने यह सोचा  है कि आप के परदादा जो आपको बहुत ज्यादा प्रेम करते थे वे फिलहाल स्वर्ग में कैसे हैं इसके अलावा आपके माता-पिता जो आपकी हर एक मनोकामना को पूरी करते हुए अपनी पूरी जिंदगी को दांव पर लगा दिया

आपको नहीं लगता कि आप उनकी खबर ले और वह  सभी कैसे हैं इस बारे में जानकारी प्राप्त करें अगर मैं आपको बताऊं कि मैं एक ऐसा जरिया जानता हूं जिससे आप बहुत ही आसानी से अपने पूर्वजों से मिल सकते हैं तो क्या आप उस सुझाव को मान ना पसंद करेंगे?

बादशाह अकबर अंधविश्वास भगवान और अपनी भावनाओं के प्रति बहुत ही कमजोर थे और भीमा ने इसी बात का फायदा उठाते हुए बादशाह को मजबूर किया जिसका खबर राजा बीरबल को

आखिर में भी माने अपने बातों के जाल में बादशाह अकबर को फंसा लिया था और बादशाह अकबर भी बहुत ही खुश हो गए थे धीमा के इस सुझाव को सुनकर कि धीमा लोगों की स्वर्ग की यात्रा करवा सकता है  क्योंकि धीमा ऐसा कह रहा था कि वह लोगों को स्वर्ग भेज सकता है और उसके पास एक ऐसी जादुई शक्ति है जिसकी मदद से वह फिर से उस इंसान को लेकिन वापस भी बुला सकता है

बादशाह अकबर ने कहा अगर तुम ऐसा कर सकते हो तो क्यों ना तुम मेरे सारे पूर्वज को यहां पर बुला कर लेकर आ जाओ भीमा ने उत्तर में कहा शहंशाह में उसी इंसान को बुला कर लेकर आ सकता हूं जिसको मैंने खुद स्वर्ग में भेजा हूं ऐसे ही इंसान को मैं बुला कर लेकर आ सकता हूं जो पहले से ही मेरे आंखों के सामने हो और जो बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान हो और दूसरों का कल्याण और अच्छा सोचता हो

चालाक नाई भाग 4

भीमा एक नाई होने के अलावा भी वह एक ज्योतिषी होने का दावा करता था जिसके पास बहुत सारी शक्तियां  था ऐसी बातें कह कर भी माने बादशाह अकबर को किसी एक ऐसे इंसान को स्वर्ग भेजने के लिए मजबूर किया

जो बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान है और बादशाह अकबर की नजरों में सिर्फ एक ही इंसान ऐसा है जो उनके पूरे राज्य में सबसे ज्यादा बुद्धिमान और प्रभावशाली  है

जो इस पहेली को बहुत ही आसान से सुलझा सकता है और  बादशाह अकबर के द्वारा होते हैं बातों को पूर्वजों तक पहुंचा सकता है और इसी के  साथ पूर्वजों से जुड़ी कुछ यादें भी लेकर आ  सकता है

बादशाह अकबर  के लिए राजा बीरबल बहुत ही ज्यादा प्रिय थे और वे नहीं चाहते थे कि राजा बीरबल स्वर्ग में जाएं और कुछ दिनों के लिए राज्य में सभी प्रकार के काम रुक जाए

क्योंकि  बादशाह अकबर संपूर्णता राजा बीरबल के ऊपर निर्भर थे क्योंकि राजा बीरबल राज्य के सभी प्रकार की गतिविधियों से लेकर हर प्रकार की सुझाव की प्रत्यक्ष रूप से विचार  विमर्श करते थे

इसीलिए बादशाह अकबर ने राजा बीरबल को स्वर्ग ना भेजने के लिए सोचा और ऐलान किया राज्य में जो भी इंसान खुद को सबसे ज्यादा बुद्धिमान मानता है वह मेरे सामने आए राजा बीरबल 

उस इंसान की बुद्धि  की परीक्षा लेंगे और जो भी इस परीक्षा में सफल होगा फिर बादशाह अकबर के द्वारा भेजा  गए  राजदूत के रूप में योग्य पुरुष माना जाएगा

बादशाह अकबर द्वारा राज्यसभा में बुलाए गए बैठक में सभी लोग शामिल हुए लेकिन किसी ने भी राजा बीरबल जितना पराक्रम और बुद्धि  नहीं था और इस वजह से आखिर में बादशाह अकबर ने राजा बीरबल को ना चाहते हुए भी इस कार्य के लिए योग्य पुरुष के रूप में चयन किया

चालाक नाई भाग 5

राजा बीरबल को पहले से ही भीमा पर शक था और इसी वजह से राजा बीरबल ने इस पहेली को सुलझाने के लिए स्वर्ग की यात्रा करने के लिए अपनी सम्मति दी और बादशाह अकबर के कहे मुताबिक स्वर्ग की यात्रा करने के लिए जो भी संसाधन की जरूरत है सभी प्रकार के संसाधनों को  भीमा के सामने उपलब्ध करवाया

भीमाने बादशाह अकबर को राजा बीरबल को अग्नि सैया में जलाने का प्रस्ताव दिया  क्योंकि स्वर्ग में धरती के  रूप को लेकर जाना संभव नहीं है और इसी वजह से भी माने बादशाह अकबर से राजा बीरबल की शरीर को जलाने के लिए अनुमति मांगी

राजा बीरबल बहुत ही चालाक थी इसलिए उन्होंने इस प्रकार के प्रयोग उनके ऊपर होना अनिवार्य था यह उन्हें पहले से ही पता था और इसीलिए इस पहेली को सुलझाने के लिए राजा बीरबल ने पहले से ही अग्नि श्रेया के ठीक नीचे ऐसा बिस्तर बनाया

जो आग लगने से पहले ही सैया को उल्टा करके ऊपर कर देता हूं और एक पुतले को अग्नि श्रेया में सुला दिया और खुद अपनी सिया के ठीक नीचे चले गए जिससे सभी को लगने लगा कि राजा बीरबल को पूरी तरह से जला दिया गया

राजा बीरबल पहले से ही  भीमा के सभी प्रकार के षड्यंत्र को समझ गए थे और इसीलिए राजा बीरबल ने भीमा को सबक सिखाने के लिए एक षड्यंत्र रचा

और अग्नि श्रेया से निकलने के बाद 3 महीने के लिए कहीं छुप जाने का तय किया  और जब सभी  को  लगने लगेगा कि राजा बीरबल हमेशा के लिए  सभी को छोड़कर चले जा चुके हैं तब से फिर से सभी के सामने उपस्थित हो जाएंगे और इस षड्यंत्र में राजा बीरबल ने बादशाह अकबर को भी शामिल किया

अभी  बादशाह अकबर ने  भीमा को एक  एक चेतावनी दी और कहा कि अगर राजा बीरबल 1 महीने के अंदर लौट कर नहीं आते हैं तो तुम्हें मौत की सजा दी जाएगी और अगर राजा बीरबल सही सलामत 1 महीने के अंदर हमारे पूर्वज  के खबर लेकर सुरक्षित स्वर्ग से लौट आते हैं तो हम तुम्हें जाने देंगे

अंतत एक महीना हो जाने के बाद भीमा ने अपनी दूसरी चाल चली राजा बीरबल के ना आने पर बादशाह अकबर को भीमा ने कहा कि हो सकता है राजा बीरबल को स्वर्ग के हर प्रकार के ऐश और आराम बहुत ही ज्यादा अच्छे लग गए और इसी वजह से उन्होंने अपने परम मित्र के पास फिर से लौट  आना उचित नहीं समझा

भीमा का कहना है कि उसने जितनी बार भी यह  प्रयोग किया है कोई भी वापस नहीं लौट आया है क्योंकि उसका कहना कि स्वर्ग के हर प्रकार के ऐश और आराम मिल जाने के कारण कोई भी इंसान फिर से धरती में अपने पुराने जीवन को जीना नहीं चाहता उसे स्वर्ग की आराम की जिंदगी अच्छी लगने लगती है हो सकता है राजा बीरबल के साथ भी कुछ ऐसा ही हुआ

 भीमा के  इस कुचक्र में बादशाह अकबर फिर से फस गए और  शहंशाह ने यह भी स्वीकार कर लिया कि हो सकता है  राजा बीरबल स्वर्ग को छोड़ना नहीं चाहते हैं और इसीलिए 1 महीने के ऊपर हो गया है लेकिन वह वापस नहीं आए

चालाक नाई भाग 6

बादशाह अकबर , राजा बीरबल को खोने के लिए खुद को दोषी मानने लगे और बहुत ही दुखी हो गए थे दो-तीन महीने बीत जाने के बाद अचानक से  एक दिन राज्यसभा में राजा बीरबल  उपस्थित हो गए

और राजा बीरबल को देखकर सभी सभासद चौक गए थे क्योंकि सभी ने ऐसा मान लिया था कि राजा बीरबल हमेशा के लिए सभी को छोड़ कर चले गए हैं बादशाह अकबर ने जैसे ही राजा बीरबल को देखा वह खुशी से दौड़ कर राजा बीरबल को  गले लगाया

 राजा बीरबल ने भीमा को राज्यसभा में बुलाने के लिए  बादशाह अकबर को अनुरोध किया बादशाह अकबर ने राजा बीरबल की इस अनुरोध को सुनते हुए जल्द से जल्द भीमा को राज्यसभा में हाजिर होने के लिए आदेश दिया

 भीमा राज सभा में जैसे ही आया उसकी आंखें चौंधी आ गई थी क्योंकि उसके अनुसार  जो भी व्यक्ति स्वर्ग में गया है वह फिर से धरती में वापस नहीं आया है

लेकिन राजा बीरबल ने सभी को झूठा साबित कर दिया है और इस बात से बादशाह अकबर बहुत ही ज्यादा फक्र महसूस कर रहे थे क्योंकि राजा बीरबल ने ऐसा कारनामा करके दिखाया जो दूसरा कोई इंसान नहीं कर सकता

  बादशाह अकबर ने राजा बीरबल को बहुत ही खुशी के साथ पूछा कि राजा बीरबल बताइए आपने हमारे पूर्वजों से बात किया या  नहीं वह कैसे हैं और वर्ग में वे किस तरह के  जिंदगी बिता रहे हैं

 बादशाह अकबर के इस प्रश्न का उत्तर देने के लिए राजा बीरबल ने भीमा को सबसे पहले धन्यवाद कहा और अपना उत्तर देना शुरू किया राजा बीरबल ने उत्तर में कहा कि मैं धन्य हो बीमा का जिसकी वजह से मैं स्वर्ग में जा पाया

और  वहां पर जाकर  मैं बहुत ही ज्यादा लालसा में आ गया था और धरती में वापस लौटने का विचार त्याग कर दिया था लेकिन  बादशाह अकबर आपके प्रेम और मित्रता मेरे लिए सबसे पहले था इसीलिए मैंने धरती में लौट जाने का निर्णय लिया

चालाक नाई भाग 7

बादशाह अकबर ने बहुत ही ज्यादा उत्सुकता के  साथ इस कार्य के लिए उन्हें भेजा गया था वह संपूर्ण हुआ या नहीं इस बारे में जानने के लिए बादशाह अकबर ने अपनी आकांक्षा व्यक्त की

राजा बीरबल ने उत्तर में कहा कि शहंशाह आपके सभी पूर्वज आपके माता-पिता सभी बहुत ही ज्यादा स्वर्ग में खुश है लेकिन उनकी आपसे एक छोटी सी अनुरोध के साथ मुझे आपके पास भेजा है

बादशाह अकबर ने इस अनुरोध के बारे में जानना चाहा तो भी राजा बीरबल ने उत्तर में कहा कि  आपके पूर्वज  सदियों से स्वर्ग में रह रहे हैंऔर इसी वजह से उनकी बाल बहुत ही ज्यादा बढ़ गया है और उन्हें काटने के लिए आपसे एक नाई की आग्रह आपके पूर्वज द्वारा आपको की गई है

राजा बीरबल की इस बात को  बादशाह अकबर ने स्वीकार किया और भीमा को स्वर्ग में भेजने के लिए आदेश दिया तभी भीमा बादशाह अकबर के द्वारा दिए इस आदेश को पालन न करने की बात व्यक्त  किया

और कहा  बादशाह अकबर मुझे माफ कर दीजिए मुझे इस तरह के किसी भी प्रकार का जादू अथवा शक्तियां नहीं है जिससे मैं किसी को स्वर्ग भेज सकूं मैं एक साधारण इंसान  हु

 हो सकता है राजा बीरबल में कुछ दिव्य शक्तियां है इसलिए वे स्वर्ग में जाकर भी फिर से धरती पर लौट आने में सक्षम हो पाए यह उनकी बुद्धिमता हो सकती है जिसकी वजह से राजा बीरबल को सभी फिर से देख पा रहे हैं

 बादशाह अकबर को तब जाकर समझ में आया कि ये  भीमा की एक सोची समझी चाल है जिसमें बादशाह अकबर बहुत ही आसानी से फंस गए थे और अपने परम मित्र राजा बीरबल को  हमेशा के लिए अपने से दूर कर  देने वाले थे

लेकिन राजा बीरबल की चतुराई की वजह से भीमा ने अपने द्वारा किए इस भूल को स्वीकार किया और कहा कि मैं किसी भी प्रकार किया नाई नहीं हूं

 मुझे आपके राज्य में आपके ही एक दुश्मन के द्वारा गुप्त चर के रूप में भेजा गया है ताकि मैं आपके और राजा बीरबल के इस मित्रता को तोड़ सकूं और आपके राज्य के  अंदर के  गतिविधियों के बारे  आपके दुश्मनों को सूचित कर सकूं इसी उद्देश्य से मुझे आपके राज्य में भेजा गया है

 बादशाह अकबर ने भीमा द्वारा  अपने द्वारा  इतनी बड़ी सच्चाई को सामने लाने की वजह से बहुत ही ज्यादा क्रोध में आ गए और बादशाह अकबर ने भीमा को मौत की सजा देने का तय किया

लेकिन  राजा बीरबल बहुत ही ज्यादा नरम दिल वाले इंसान थे और इसी वजह से उन्होंने धीमा को मौत की सजा  ना देने के लिए अनुरोध किया और बादशाह अकबर को एक प्रस्ताव दिया कि –

जिस तरह भीमाने हमारे राज्य में किसी और के गुप्तचर के रूप में कार्य किया है उसी प्रकार हम हमारे दुश्मन के राज्य में  भीमा को हमारे गुप्तचर के रूप में उसके राज्य में भेजेंगे और इसी तरह इसे दंड भी मिलेगा और अपने भूल की पश्चाताप  करने का एक सही उपाय उपलब्ध होगा

 

 

 

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