अकबर बीरबल की कहानियां

स्वागत है आपका हमारे इस ब्लॉग पोस्ट  में इस ब्लॉग पोस्ट की मदद से हम अकबर बीरबल की कहानियां को पेश करने जा रहे हैं जहां  अंधविश्वास की वजह से बीरबल और अकबर के बीच में जो बातें हुई उन्हीं को हम इसमें बताएंगे और इसके अलावा अकबर को एक महर्षि ने अंधविश्वास के जो झूठे ज्ञान  प्रदान किया उसके बारे में भी हम बात करेंगे 

मनहूस इंसान की प्रतिमा – अकबर बीरबल की कहानियां

एक बार बादशाह अकबर अपने महल में एक महा उत्सव हुआ जिसमें उत्सव के बाद अपने कक्ष में विश्राम करने के लिए चले गए सुबह का वक्त था जब सभी द्वारपाल सो रहे थे और  महल के सभी मंत्री मंडल और  रानी अभी सो रही थी |

तभी अचानक से बादशाह अकबर का पानी पीने की इच्छा हुई मुझे बहुत ज्यादा प्यास लगी हुई थी सुबह का वक्त था उन्होंने कई बार अपने  द्वारपाल तथा सेवक को पुकारा लेकिन आदेश सुनने के लिए कोई भी मौजूद नहीं था  सभी नींद में थे ||

अकबर की चिल्लाने की आवाज सुनकर महल में काम कर रहे हैं सेवक की नजर उन पर पड़ी जो अकबर की फूलों के बगीचों में काम करता था जो अकबर की सभी सुंदर फूलों को और उनके पैरों को ख्याल रखता था ,उस मालि का नाम था विजय ||

विजय अकबर के द्वारा चिल्लाने की आवाज सुन सुन के अकबर के शयनकक्ष में जाकर पधारे और  उनके द्वारा मांगी गई आदेश की इज्जत करते हुए अपने साथ पानी भी लेकर गया क्योंकि विजय को पता था अकबर पानी की प्यार की वजह से अपने सेवक को बुला रहे हैं |

लेकिन सुबह के वक्त होने की वजह से कोई भी सेवक अकबर के शयन कक्ष के द्वार पर खड़ा नहीं था और दूसरी ओर विजय एक माली था जो अकबर  के  सेवक होने का फर्ज निभा रहा था ||

जब विजय ने देखा कोई भी सेवक आगे नहीं बढ़ रहा है तो वह बादशाह अकबर के सामने पानी लेकर उपस्थित हुआ अकबर प्यास के मारे तड़प रहे थे और उन्होंने विजय कहां जात अथवा कार्य की पद को ना देखते हुए उसके द्वारा प्रदान किए पानी को  ग्रहण किया और विजय का धन्यवाद किया ||

बादशाह अकबर बहुत खुश थे कि उनके दरबार में हर एक वह काम करने वाला सेवक उनके लिए बहुत ही ज्यादा विश्वसनीय और सहनशील है  और ऐसा सोच के बादशाह जब  फिर से से विश्राम करने के लिए प्रस्तुत हो रहे थे ||

तभी अचानक बादशाह की तबीयत खराब हो गई और वे खून की उल्टियां करने लगे बादशाह की इस हालत को देखकर सेवक नींद से जाग गए और पूरे महल में यह खबर फैल गई कि बादशाह अकबर की तबीयत बहुत ही खराब हो गई और यह सुनकर सभी रानियां और प्रजा सेवक सभी बादशाह के  विश्राम कक्ष में जाकर उपस्थित होते हैं ||

बादशाह अकबर के इस  हाल को देखकर महारानी जोधा ने राजवैद्य और  राज ज्योतिष दोनों को दरबार में उपस्थित होने के लिए पैगाम भिजवाया || बादशाह अकबर को राजवैद्य ने अपने द्वारा बनाए जड़ी बूटी और चिकित्सा पद्धति के द्वारा उन्हें  सफलतापूर्वक निरोग करने में सक्षम रहे

महारानी और बादशाह अकबर दोनों राज्य ज्योतिष भीमराव को बहुत ही ज्यादा मानते थे भीमराव की द्वारा की गई हर एक भविष्यवाणी राज्य के हित के लिए सही रहे |

और उनके द्वारा किए गए सभी प्रकार के अनुमान हमेशा सही रहते थे जिस वजह से बादशाह अकबर ने उन्हें अपने राज्य का सबसे खास ज्योतिष  के पद से  नवाजा और पूरे राज्य में उनकी बहुत सम्मान होने लगा ||

बादशाह अकबर के इस प्रकार अचानक से स्वास्थ्य  बिगड़ने की वजह से सभी राज्यों के महा मंत्रियों और महारानी में चिंता आ गई कि ऐसा क्यों हुआ और इसी वजह से सभी ने  राजज्योतिषी भीमराव को अपने ज्योतिष विद्या द्वारा इसका अनुमान लगाने के लिए आग्रह किया ,

 भीमराव ने सर्वप्रथम बादशाह अकबर से सुबह ऐसा क्या उन्होंने पान किया जिसकी वजह से इस प्रकार की स्वास्थ्य परिवर्तन देखने को मिला इस बारे में पूछा तो भी बादशाह अकबर ने  विजय नामक एक सेवक जो अकबर के बगीचे में माली था और उनकी सभी प्रकार के फूलों का देखभाल करता था  उसके बारे में भीमराव को बताया |

 बादशाह अकबर ने कहा कि उन्हें बहुत ही ज्यादा प्यास लगी थी और उन्हें पानी पीना था लेकिन कोई भी सेवक सुबह मौजूद ना होने की वजह से विजय ने अपने हाथों पानी लाकर मुझे पिलाया ||

जिसकी वजह से मुझे पानी की प्यास से मुक्ति मिली लेकिन उसके पानी पिलाने के कुछ ही देर बाद मेरे स्वास्थ्य में कुछ परिवर्तन देखने को मिला और देखते ही देखते खून की उल्टी करने लगा |

भीमराव बादशाह अकबर की इन बातों को सुनकर विजय नामक मालिक के ऊपर मिथ्या दोष लगाने लगा भीमराव के अनुसार विजय बादशाह अकबर के राज्य का सबसे मनहूस इंसान है जो इंसान सुबह उठकर सबसे पहले विजय का चेहरा दिखता है उसका संपूर्ण दिन परेशानियों से गुजरता है|

और जिसका असर बादशाह के ऊपर भी देखा गया बादशाह सुबह जब विजय के हाथों से पानी पी रहे थे तभी शायद बात शाह की नजर विजय के चेहरे पर पड़ी होगी और जिसकी वजह से बादशाह के स्वास्थ्य में इस तरह के परिवर्तन देखने को मिला ||

राजज्योतिष भीमराव के अनुसार राज्य का हर एक इंसान विजय से पीड़ित है क्योंकि विजय जन्म से ही एक मनहूस प्रवृत्ति का व्यक्तित्व लेकर जन्म लिया है |

भीमराव का ऐसा मानना है कि ऐसे इंसान हमेशा लोगों के हानि का मूल कारण बनते हैं विजय के जन्म के समय भीमराव ने ही विजय की कुंडली देखी थी और जहां से  भीमराव ने  विजय के प्रति इस प्रकार का अनुमान राज्य के मंत्री और महारानी के सामने प्रदर्शित किया ||

बादशाह अकबर ने विजय के इस रूप के  बारे में जानने के बाद मंत्रिमंडल के बैठक में विजय को  मौत की सजा देने का तय किया और मंत्रिमंडल ने भीमराव के इस प्रकार की बातों को सुनने के बाद बादशाह अकबर के इस फैसले पर अपनी सम्मति  प्रदान किया |

बादशाह अकबर के सबसे विश्वसनीय अगर कोई राज्य मंत्री थे तो वह बादशाह अकबर के परम मित्र राजा बीरबल थे जो बादशाह अकबर के सभी प्रकार के महत्वपूर्ण न्याय और विचार विमर्श के बाद ही सभी प्रकार के आदेश दिया करते थे

 बादशाह अकबर ने विजय को मौत की सजा देने का तय किया और पूरे सभा के सामने विजय को अपने द्वारा किए सभी प्रकार के  दोस्त उसे बताया किस तरह उसकी चेहरे के दर्शन मात्र से सभी प्रकार के लोगों को कितना हानि हो रहा है और उसे मौत की सजा देने का तय किया

 बादशाह अकबर एक बहुत ही रहे दिल इंसान थी उन्होंने विजय को 1 दिन का मोहल्ला दिया और बताया  तुम एक दिन मैं अपने परिवार के सदस्यों से अंतिम भाग मिल लो  क्योंकि हम तुम्हें तुम्हारे परिवार से हमेशा के लिए दूर करने जा रहे हैं

विजय ने बादशाह अकबर के आदेश को सुनते हुए सबसे पहले राजा बीरबल से मिलना उचित समझा और बीरबल से मिलने के पश्चात विजय ने अपने सभी प्रकार की दुखों के बारे में बताया कि किस तरह  बादशाह अकबर के राज्य में उसके ऊपर हो रहे ऊंच-नीच को प्रदर्शित किया

विजय का कहना है कि वह एक सीधा-साधा गरीब इंसान है जो बादशाह अकबर की इमानदारी से सेवा करता है फिर भी उनके राज्य के लोग उसे एक मनहूस का दर्जा देते हैं लोगों के द्वारा किए गए गलत निर्णय

तथा गलत कार्यों की वजह से विजय को हमेशा  दोषी ठहराया जाता हैऔर जिसकी वजह से लोगों ने विजय के प्रति एक ऐसा छवि बना लिया है कि जैसे विजय एक बहुत ही मनहूस इंसान है

 विजय ने अपने सभी प्रकार के दुखों का खुलासा किया राजा बीरबल के सामने और उसके बाद राजा बीरबल ने बादशाह अकबर के साथ विजय के इस विषय को लेकर बात करना सही समझा और इसी उद्देश्य से राजा बीरबल बादशाह अकबर से मिलने चले गए 

बादशाह अकबर पूरी तरह से  ठीक हो चुके थे और उन्होंने राजा बीरबल को देखकर बहुत ही ज्यादा खुश हो गए थे राजा बीरबल ने बादशाह अकबर के साथ मिले और विजय के बारे में सबसे पहले पूछा अकबर का मानना है कि पूरे राज्य के लोग  विजय से बहुत ही ज्यादा नफरत करते हैं उसके द्वारा किए गए कार्यों की वजह से

 राजा बीरबल ने बादशाह अकबर की बात को सम्मान दिया और कहा कि मैं आपकी सभी बातों  की इज्जत करता हूं इसी वजह से बादशाह अबकी बार फिर से अपने द्वारा दिया आदेश के ऊपर अमल करें हो सकता है आपको  कुछ गलत सूचनाएं प्रदान की गई है

 राजा बादशाह कहा कि अगर मैं आपको विजय से भी ज्यादा मनहूस इंसान आपके सामने लाकर प्रस्तुत करता हूं तो क्या आप विजय को माफ कर देंगे बादशाह का कहना है विजय ने अपने  चेहरे से सभी लोगों को भ्रमित किया

जिसकी वजह से लोगों के अंदर विजय को लेकर एक प्रकार का डर आ गया और जिस डर की वजह से लोगों ने अपना मनोबल खोया और गलत काम किया जो काम से ही होना था अपने मनोबल कम हो जाने की वजह से उसे ठीक तरह से नहीं कर पाए और हमेशा इसी वजह से काम खराबहो जाता है

 राजा बीरबल के अनुसार  मनुष्य अपने कार्य और अपने   गुण और  अवगुणों की वजह से समाज में एक गुण तथा कार्य करने की क्षमता है तो वह एक निष्ठावान इंसान कहलाता है लेकिन अंधविश्वास  के प्रति सहानुभूति दिखाकर आप किसी ऐसे निष्ठावान सेवक को इस तरह मृत्युदंड नहीं दे सकते

राजा बीरबल ने फिर से बादशाह अकबर को उस सुबह हुए घटना को याद करने के लिए कहा और इस बार राजा बीरबल  विजय की तरफ से सोचने के लिए बादशाह अकबर को कहां बीरबल ने कहा महाराज आपको लगता है 

विजय एक मनुष्य इंसान है लेकिन मेरा मानना है कि विजय से ज्यादा मनहूस इंसान एक और है जो है आप खुद क्योंकि विजय अपने  दिन शैली को पूरा करता हुआ जा रहा था

और हर सुबह की तरह आप के  फूलों की बगीचों में पौधों को पानी दे रहा था लेकिन आपके प्यास लगने की वजह से विजय आपका कुछ हो ना जाए इसी वजह से आप की प्यास बुझाने के लिए उसने अपने हाथों से आप को पानी पिलाया और आपका प्यास बुझा या

लेकिन उसे थोड़ी ना पता था कि वह आप के मुख्य मंडल का दर्शन करने जा रहा है जिसकी वजह से उसे आज मौत की सजा मिलेगी तो आप ही बताइए इस पूरे घटनाक्रम में सबसे ज्यादा मनहूस तो आपकी हुए क्योंकि विजय ने आपकी वजह से अपने परिवार से बिछड़ने जा रहा है और  मृत्यु शैया में लेटने जा रहा है

 बादशाह अकबर आप ही बताइए इस अन्याय क्या आपकी नजरों में किसी भी प्रकार का न्याय नहीं लिखा है??राजा बीरबल की बातों को सुनकर बादशाह अकबर अपने द्वारा दिए आदेश की वजह से अफसोस प्रकट करने लगे उन्हें एहसास हुआ कि उन्होंने विजय को जो मृत्यु दंड दिया वह बहुत ही गलत था

इंसान कभी भी मनहूस नहीं होता उसके द्वारा किए गए  कार्य से एक इंसान अच्छा या बुरा प्रमाणित होता है अगर एक इंसान अच्छा कार्य करता है तो वह अच्छा इंसान कहलाता है और अगर एक इंसान बुरा कार्य करता है तो वह समाज की नजरों में बुरा इंसान कहलाता है

  लेकिन विजय  ने मुझे पानी पिला कर  अपना सेवक होने का फर्ज अदा किया लेकिन मैंने बादशाह होकर भी  उसके साथ न्याय नहीं किया जिसका मुझे बहुत ही अफसोस है

 राजा बीरबल ने फिर राज ज्योतिषी के द्वारा किए गलत अनुमान को बादशाह अकबर के सामने प्रकट किया और कहा कि राज्य ज्योतिषी  के हर एक अनुमान सही हो जाए ऐसा जरूरी नहीं है

राजा बीरबल का कहना यह है कि राज्य ज्योतिषी एक ब्राह्मण है और वह अपने से छोटे जात को अपने सामने देखना अथवा अपने बराबर खड़े होना अच्छा नहीं मानते

और विजय के साथ ही ऐसा हुआ क्योंकि विजय एक छोटे  जात का है जो राज्य ज्योतिषी को बिल्कुल पसंद नहीं था और उसे अपने नजरों के सामने से हटाने के लिए और इस समाज में ब्राह्मण की मर्यादा को सबसे ऊंचा रखने के लिए उन्होंने इस प्रकार  का घिनौना आरोप विजय पर लगाया,

राजा बीरबल  ने विजय के ऊपर लगाए आरोपों और मृत्युदंड को हटाने के लिए  बादशाह अकबर को अनुरोध किया और एक आपातकालीन सभा  बुलाने की मांग की जहां पर राज्य ज्योतिषी को सही सबक  मिलने के लिए आग्रह किया

 बादशाह अकबर ने राजा बीरबल के द्वारा कहे गए सभी प्रकार की बातों को सुनने के बाद सभा में राज्य ज्योतिषी को इस प्रकार की कार्यों को संपादन करने की वजह से उन्हें कालकोठरी में डाल दिया

और विजय को अपने राज्य का एक निष्ठावान इंसान घोषित किया जिसके बाद से विजय को सभी ने  अपनाया और बादशाह अकबर ने ऐसा भी ऐलान किया कि अगर कोई भी राज्य का व्यक्ति विजय को मनहूस कहते हुए अथवा  मनहूस होने जैसा बर्ताव करते हुए पकड़ा गया तो उसे दंड दिया जाएगा

 बादशाह अकबर के द्वारा किए इस न्याय की वजह से विजय बहुत ही खुश हुआ और फिर से अपने खोए हुए व्यक्तित्व और सम्मान को वापस पाने में सक्षम रहा पूरे समाज ने उसे फिर से अपनाया और वह फिर से अपने परिवार के साथ एक खुशहाल जिंदगी बिताने लगा

 

 

 

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