अकबर बीरबल की कहानियां बच्चों के लिए

अकबर बीरबल की कहानियां बच्चों के लिए – स्वागत है आपका हमारे एक और  ब्लॉक पोस्ट में जिसमें हम अकबर और बीरबल की एक ऐसी गाथा लेकर आए हैं जिसमें बीरबल द्वारा एक चालाक चोर को बहुत ही चतुराई के साथ पकड़ने की परीक्षा में कैसे बीरबल ने उस चोर को हराया इस बारे में बताएंगे

इस कहानी के माध्यम से हम सभी हमारे पाठक बंधुओं को यह  सीख देने की कोशिश करेंगे कि चतुराई कितनी भी कर ले आप लेकिन सत्य के सामने झूठ कभी नहीं टिक पाता इसलिए आप हमेशा सच की राह पर चलें और गलत काम करने से खुद को रोके ताकि समाज में आपकी सम्मान में वृद्धि हो ||

अकबर बीरबल की कहानियां बच्चों के लिए

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बादशाह अकबर के राज्य में लक्ष्मी नारायण  नाम का एक बहुत ही धनवान सेठ रहता था जिसका लोहे का कारखाना था और वह अपने लोहे के कारखानों में बहुत सारे लोगों को काम करवाता और  सभी मजदूरों  से बहुत ही प्यार करता था

लक्ष्मीनारायण अपने सभी मजदूरों में से चार ऐसे मजदूर थे जो उसके बचपन के दोस्त थे  वह सभी चारों दोस्त लक्ष्मी नारायण के बहुत ही दिल के करीब थे और इसीलिए लक्ष्मी नारायण  अपने घर  के और अपने कारखाने दोनों जगह के काम करवाता और उन्हें दूसरे मजदूरों से ज्यादा धन और प्यार दोनों ही देता था

लक्ष्मी नारायण के चारों दोस्तों के नाम भीमा, राजू, नीलेश और  भीकू था चारों में से भीमा बहुत ही शक्तिशाली था राजू बहुत ही बुद्धिमान था नीलेश एक बहुत ही आलसी तरह का इंसान था और भी कुछ जो किसी से ज्यादा बात नहीं करता सिर्फ अपनी ही काम में खोया रहता था

भीमा बहुत ही शक्तिशाली था इसकी यह लक्ष्मी नारायण ने उससे अपने घर के सभी भारी काम जैसे कि घर को साफ करना और इसी के साथ कारखाने में अपने सभी प्रकार के भारी चीजों को उठाने से लेकर उन्हें साफ करने का काम भीमा से करवाता था

राजू बहुत ही बुद्धिमान व्यक्ति था  और लक्ष्मी नारायण का खास  तथा विश्वसनीय था इसीलिए लक्ष्मीनारायण ने उससे घर के सभी प्रकार के हिसाब और कारखाना की हर एक प्रकार के धन तथा हिसाब का प्रधान दायित्व उसे दिया था

उसी तरह नीलेश बहुत ही आलसी इंसान था वह हमेशा किसी एक जगह में बैठकर ही काम करना पसंद करता था इसलिए लक्ष्मीनारायण ने उसे अपने घर  के बावर्ची  बनाया था निलेश बहुत ही अच्छे पकवान बनाता था और लक्ष्मी नारायण  उसके द्वारा बनाए सभी प्रकार के भोजन को बहुत ही खुशी से पेट भर के खाते थे

भीकू जो लक्ष्मी नारायण के सबसे खास दोस्त थे भीकू से लक्ष्मी नारायण अपने सभी प्रकार की मजदूरों को सही से काम करने के लिए और सही मार्ग दिखाने  का दायित्व  उसे दिया  था

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लक्ष्मी नारायण को नीलेश भीकू भीमा और राजू सभी बहुत ही प्रेम करते थे लेकिन लक्ष्मी नारायण की तरक्की को देख के चारों में से कोई एक  उससे बहुत ही ज्यादा  जलता था

लक्ष्मीनारायण को इस बात की खबर तब लगी जब वह  देखने लगा कि उसके हर एक काम ने किसी ना किसी प्रकार का  असुविधा आ जाता था और तो काम खराब हो जाता था

 लक्ष्मीनारायण समझ गया था कि इन चारों में से कोई एक उसके साथ बहुत ही बुरा कर रहा है  क्योंकि वह उन सभी चारों दोस्तों को बचपन से जानता था और उन्हें बहुत ही ज्यादा नहीं करता था इसलिए कभी भी उन्हें इस बारे में नहीं पूछा

लक्ष्मी नारायण की पत्नी थी जिसका नाम  रसिका  देवी था रसिका हर सुबह लक्ष्मी नारायण के लिए अपने हाथों से सुबह का खाना बनाती थी और जिसमें नीलेश उसकी बहुत ही ज्यादा मदद करता था

निलेश भी लक्ष्मी नारायण के खाने का बहुत ज्यादा ध्यान  रखता था क्योंकि वह लक्ष्मीनारायण से बहुत ही ज्यादा प्रसन्नता क्योंकि नीलेश एक आलसी इंसान था और  लक्ष्मीनारायण ने उसे उसके स्वभाव के जैसा ही काम प्रदान किया था जिससे वह बहुत ही ज्यादा खुश था

एक बार की बात है जब लक्ष्मीनारायण और  रसिका देवी  का  शादी की सालगिरह था और उस सालगिरह के मौके पर लक्ष्मी नारायण ने अपने पत्नी को एक सोने का हार उपहार के रूप में दिया था

रसिका अपने पति से सोने का हार उपहार में मिलने से बहुत ही ज्यादा खुश थी और उसे पहनकर सोया करती थी और हर एक काम करती थी

कुछ दिनों बाद जब लक्ष्मीनारायण अपने काम के सिलसिले में दूसरे राज्य चले गए तब रसिका  रात को सभी प्रकार के काम को खत्म करकेअपने शयनकक्ष में आराम कर रही थी  और लक्ष्मी नारायण नहीं थी जिसका फायदा उठाते हुए किसी ने रसिका देसी के गले का हार चुरा लिया था

रसिका जब सुबह उठकर  तैयार होने के लिए अपने कक्ष में लगे आईने के सामने जाती है तो देखती है कि उसके पति के द्वारा दिए सोने  का हार उसके गले से किसी ने चुरा लिया है

रसिका अपने हार को गले से गायब देखकर चिल्लाने लगी और जोर जोर से रोने लगी और उसी दिन लक्ष्मी नारायण अपने व्यापार का सभी प्रकार के काम को खत्म करके अपने घर लौट आए

लक्ष्मीनारायण ने घर में लौटने के बाद देखा कि रसिका बहुत ही दुखी है और लक्ष्मीनारायण ने उनके दुखी होने का कारण पूछा तभी रसिका ने कहा कि एक रात पहले किसी ने चोरी छुपे रसिका के शयन कक्ष में घुस के उसका सोने का हार चुरा लिया है और इसी वजह से रसिका बहुत ही ज्यादा दुखी है

लक्ष्मी नारायण को पता था कि यह कार्य उन चारों के अलावा और कोई नहीं कर सकता था क्योंकि बचपन से ही लक्ष्मीनारायण को यह पता था कि उन चारों में से कोई एक उन्हें प्यार नहीं करता था और उनकी तरक्की से बहुत ही ज्यादा जलता था लेकिन लक्ष्मीनारायण ने कभी भी इस बात को उनके सामने प्रकट नहीं किया और  उनके प्रति बहुत ही ज्यादा प्रेम था इसी वजह से वह हमेशा चुप रहे

अभी लक्ष्मी नारायण की परीक्षा की घड़ी थी क्योंकि एक तरफ पत्नी को दिया हुआ उपहार था जो गायब था जिसकी वजह से रसिका बहुत ही ज्यादा दुखी थी और दूसरी तरफ उनके दिल के करीब रहने वाले चार दोस्त  जिनमें से किसी ने इस हार को चुराया है उसे ढूंढना

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लक्ष्मीनारायण रसिका के मुरझाया हुआ चेहरा को देखकर बहुत ही ज्यादा दुखी हो गए थे और वे चाहते थे कि रसिका के हार को चोरी करने वाला जल्दी पकड़ा जाए और इसी के साथ वे यह भी चाहते थे कि उन चारों में से कोई एक खुद से उसने ही हार को चोरी किया है इस बात को कुबूल करें

क्योंकि अगर  लक्ष्मीनारायण खुद से उन चारों को जोर जबरदस्ती अथवा गुस्से से पूछेंगे तो चारों को ही बुरा लगेगा और वे लक्ष्मीनारायण को छोड़कर चले जाएंगे इसी वजह से लक्ष्मीनारायण बहुत ही ज्यादा चिंतित रहने लगे

फिर एक दिन लक्ष्मीनारायण ने राजा बीरबल के पास जाना सही समझा क्योंकि अकबर के  राज्य में बीरबल ही एकमात्र ऐसे पुरुष थे जो बहुत ही ज्यादा बुद्धिमान थे और इस कठिन परिस्थिति में एक राजा बीरबल ही लक्ष्मी नारायण की मदद कर सकते थे

लक्ष्मीनारायण ने राजा बीरबल के पास गए और उन्होंने  अपने पत्नी तथा अपने चार दोस्तों के बारे में बताया फिर राजा बीरबल ने कहा कि अगर आपको चोर को पकड़ना है तो  तो मैं आपको जैसा कहता हूं आप वैसा करते जाइए

राजा बीरबल ने लक्ष्मी नारायण को अपने घर के एक ऐसे जगह में सोने की मुद्रा को रखने के लिए कहा जहां सभी की नजर पड़ती हो और उस जगह में सभी बड़े ही आसानी से जा सकते हो

राजा बीरबल के कहे मुताबिक लक्ष्मीनारायण ने ऐसा किया और रात को सभी सोने के बाद फिर से किसी एक चोर ने घुसकर सभी मुद्राओं को चोरी करके चला गया

सुबह उठकर लक्ष्मीनारायण ने देखा उसके द्वारा रखे गए सोने की मुद्राओं को किसी ने अपने स्थान से गायब कर दिया है और तभी लक्ष्मीनारायण ने अपने सभी सेवक और दोस्तों को बुलाया और कहा जिसने भी यह कार्य किया है वह मेरे सामने आ जाए और अपनी भूल को स्वीकार कर ले अगर   वह चोर मेरे सामने नहीं आता तो मैं  बादशाह अकबर के दरबार में जाकर अर्जी लगा लूंगा फिर राजा बीरबल ही आपको देख लेंगे

लक्ष्मी नारायण के कहे मुताबिक किसी ने भी किसी प्रकार का उत्तर नहीं दिया और लक्ष्मीनारायण ने बादशाह अकबर को अपने  साथ हुए सभी प्रकार के चोरियों के बारे में विस्तार से बताया

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बादशाह अकबर ने  इस घटना को सुनते हुए लक्ष्मीनारायण को सहानुभूति दिया और कहा कि हम आपसे वादा करते हैं कि हम आपके घर में हो  रहे चोरी की जड़ तक पहुंचेंगे और  चोर को आपके सामने पेश करेंगे और इस वादे को पूरा करने के लिए बादशाह अकबर ने राजा बीरबल को सबसे सही इंसान माना और उन्हें यह दायित्व  प्रदान किया |

राजा बीरबल ने लक्ष्मीनारायण से अपने घर में काम करने वाले सभी सेवक को बादशाह अकबर के दरबार में आने के लिए आमंत्रण भेजा लक्ष्मीनारायण को पता था कि इन चारों में से कोई एक  चोर है जिसने सभी प्रकार की  चोरी की है और इसीलिए लक्ष्मीनारायण ने दरबार में सिर्फ उन्हीं चार दोस्तों को भेजा जो  उसके दिल के करीब थे |

राजा बीरबल ने लक्ष्मी नारायण के चारों दोस्तों को एक एक लकड़ी दिया और कहा कि मैं एक जादुई शक्ति का मालिक हूं और मुझे यह पता चल जाता है कि कौन चोरी कर सकता है और कौन चोरी नहीं कर सकता है ||

राजा बीरबल की इस बात को सुनकर बादशाह अकबर चौक गए और कहा कि अगर तुम इतनी ही शक्तिशाली हो तो क्यों ना अभी इस बात का प्रमाण दे दो और  सभी के सामने यह बता दो कि कौन चोर है |

बादशाह अकबर के इस आदेश को सुनकर राजा बीरबल उत्तर में कहा शहंशाह माफ करें मैं ऐसा नहीं कर सकता क्योंकि लक्ष्मी नाराय लक्ष्मीनारायण  इन चारों से बहुत ही ज्यादा नहीं करते हैं यह चारों ही लक्ष्मी नारायण के दिल के करीब और मैं भरी सभा में इन चारों में से किसी एक को बिना प्रमाण के चोर नहीं कह सकता इसीलिए मैंने चारों को एक  एक करके जादुई लकड़ी दिया है || 

इन चारों लकड़ी में एक तरह का शक्ति है जो असली चोर है उसकी लकड़ी अपने आप 1 दिन के  अंदर बाकी तीन लकड़ियों के मुकाबले बड़ी हो जाएगी और जो लकड़ी सबसे ज्यादा बड़ी होगी  उसके मालिक को जोर करार किया जाएगा||

राजा बीरबल ने लक्ष्मी नारायण के चारों दोस्तों को उन  लकड़ियों को अपने साथ ले जाने के लिए कहा और उन्हें अपने पास 1 दिन के लिए रखने के लिए कहा |

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लक्ष्मी नारायण के चारों दोस्तों में राजू जो सबसे ज्यादा बुद्धिमान था और लक्ष्मी नारायण का सबसे ज्यादा विश्वसनीय पात्रता उसने खुद को चोर साबित ना हो जाए इसी डर से रात को उसने राजा बीरबल द्वारा दिए लकड़ी  को काट के आधा बना दिया और खुश होने लगा कि अभी उसे कोई पकड़ नहीं सकता क्योंकि राजा बीरबल के मुताबिक जो भी लकड़ी सबसे ज्यादा लंबी होगी वही चोर होगा

अगली सुबह लक्ष्मी नारायण के चारों दोस्त  बादशाह अकबर के दरबार में पहुंचे और सभी ने राजा बीरबल द्वारा दिए लकड़ी को राजा  बीरबल के सामने प्रस्तुत किया

राजा बीरबल ने चारों लकड़ियों को बहुत ही ध्यान से देखा और  भीकू भीमा  तथा निलेश तीनों के लकड़ियों में किसी प्रकार का अंतर नहीं देखा लेकिन जैसे ही राजा बीरबल ने राजू की लकड़ी को देखा तो उसमें बाकी सारे लकड़ियों के तुलना में थोड़ी सी छोटी देखने को मिला

तभी राजा बीरबल समझ गए थे कि चोर कोई और नहीं है बल्कि राजू ही है क्योंकि उसने अपने पकड़े जाने के डर से लकड़ी को घर में जाकर ही छोटा कर दिया

राजा बीरबल ने बहुत ही चालाकी से  लक्ष्मी नारायण के तीन दोस्त भीकू भीमा और नीलेश को जाने दिया और राजू को कहा कि  तुमको बादशाह अकबर एक उपहार देंगे तुम्हें यहां रुकना होगा यह सुनकर राजू बहुत ही खुश हुआ और बादशाह के दरबार में रुक गया और बाकी तीन लक्ष्मी नारायण के घर पर चले गए फिर लक्ष्मीनारायण को बुलाया गया और राजा बीरबल ने सभी राज दरबार के सभासदों के सामने राजू को  चोर करार दिया गया

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राजू  राजा  बीरबल से अपने चोर होने का प्रमाण मांगने लगा तभी राजा बीरबल ने कहा कि अगर तुम सच में चोर नहीं हो तो मेरे द्वारा दिए लकड़ी को तुमने क्यों काटा अगर तुम चोर नहीं होते तो तुम अपनी जगह सही रहते और लकड़ी को छोटा नहीं करते

बादशाह अकबर ने राजू  द्वारा हुए इस प्रकार के  किए  घिनौने चोरी को देख कर उसे चोरी करने का कारण पूछा तभी राजू ने बताया कि लक्ष्मी नारायण बचपन से उसका बहुत ही खास दोस्त है लेकिन   लक्ष्मीनारायण ने उसे हमेशा इस्तेमाल  किया उसके बुद्धिमता की मदद से उसने हमेशा सफलता प्राप्त किया और जिसका  बहुत ही छोटा हिस्सा उसने राजू को दिया

राजू ने यह भी कहा कि उसकी बुद्धिमता की वजह से ही लक्ष्मीनारायण आज इतनी ऊंचाई पर पहुंच पाया है लेकिन लक्ष्मीनारायण ने कभी भी उसे अपने द्वारा कमाए धन का एक हिस्सा भी नहीं दिया हमेशा एक मजदूर की तरह काम करवाया

राजू एक बुद्धिमान इंसान था और वह अपने बुद्धि को काम में लगा कर लक्ष्मी नारायण के सभी प्रकार के व्यापार को संभालता था लेकिन उसे अपने बुद्धि के तुलना में जितना धन मिलना चाहिए उतना मिलता नहीं था

और इसी वजह से राजू ने रसिका देवी का सोने का हार चोरी करने का तय किया और उसी के साथ लक्ष्मी नारायण द्वारा रखे सोने के मुद्राओं को भी चुराया

बादशाह अकबर ने यह बात सुनने के बाद राजू को समझाया कि हम हमारे बुद्धि को काम में लगा कर ही समाज में सभी प्रकार की कठिन कार्य को करते हैं लेकिन अगर अपने बुद्धि को प्रकार के बुरे कामों में लगाओगे तो कभी भी समाज में तुम्हें सम्मान की प्राप्ति नहीं होगी

लक्ष्मीनारायण तुम्हें  अपने दिल के सबसे करीब और सबसे खास दोस्त मानते हैं लेकिन तुम्हारे द्वारा किए इस प्रकार के काम की वजह से तुम उनकी नजरों में गिर गए

राजू को अपने द्वारा किए चोरी की वजह से बहुत ही ज्यादा पश्चाताप हुआ और उसने लक्ष्मीनारायण से माफी मांगा और उसके द्वारा किए सभी प्रकार के चोरी के सामग्री को फिर से लक्ष्मी नारायण को लौटा दिया

और फिर से लक्ष्मी नारायण के यहां ईमानदारी और विश्वास को बरकरार रखते हुए काम करता गया और अपनी बुद्धिमता से लक्ष्मी नारायण को बहुत ही ज्यादा सफलता दिलाने में कामयाब रहा |

जिसकी वजह से लक्ष्मीनारायण ने भी अपने सफल होने का आधा हिस्सा उसे देने लगा जिससे राजू और भी ज्यादा उत्साह से काम करता गया और  बाकी दोस्तों की तरह  राजू भी अपने घमंड और चालाकी को दूर करके लक्ष्मी नारायण का एक अच्छा दोस्त बन गया ||

 

 

 

 

 

 

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