अकबर बीरबल की कहानियां न्यू

अकबर बीरबल की कहानियां न्यू – स्वागत है आपका हमारे एक और ब्लॉक में इस ब्लॉक में हम राजा बीरबल की एक ऐसी चतुराई की कहानी बताने जा रहे हैं जिसमें बीरबल ने एक पिंजरे में बंद शेर को बिना खोले ही निकाला  था जिससे पूरी रात सभा बीरबल  को अपनी बुद्धिमता की वजह से  राजा बीरबल को प्रणाम करने पर मजबूर हो गई थी ||

 इस कहानी के माध्यम से हम यह सीखने की कोशिश करेंगे कि हम अपने दिमाग की चतुराई की मदद से कैसे हर एक मुश्किल को बड़े ही आसानी से हल कर सकते हैं और जीवन में हमारे दिमाग की चतुरी हमको किस-किस परेशानियों से बचा सकती है इसका एक बहुत ही छोटा लेकिन शक्तिशाली उदाहरण  हम बीरबल की चतुराई के माध्यम से आपके सामने प्रस्तुत करने की कोशिश  करेंगे ||

अकबर बीरबल की कहानियां न्यू

सोने का शेर भाग - 1

पर्शिया के शहंशाह के शहंशाह और बादशाह जलालुद्दीन अकबर के बीच में बहुत ही ज्यादा गहरी दोस्ती थी दोनों ही अपने राज्य में जब भी किसी प्रकार का  आपदा या बाहरी ताकतों से हमला होता था तो दोनों ही दोस्त  एक दूसरे को शक्ति  

तथा बुद्धि से मदद करते थे दोनों ही राज्य में बहुत ही अच्छा तालमेल था और दोनों ही शहंशाह एक दूसरे को अपने भाई की तरह मानते थेबादशाह अकबर और पर्शिया के शहंशाह  के बीच राजा बीरबल को लेकर हमेशा बुद्धि की चुनौतियां लगाई जाती थी

इसमें राजा बीरबल हमेशा ही बादशाह अकबर के उम्मीदों पर खरे उतरे हैं और पर्शिया के शहंशाह यह बात जानते थे कि बादशाह अकबर के पास सबसे कीमती अगर कोई चीज है तो वह उनके परम मित्र राजा बीरबल है

और पर्शिया के शहंशाह  राजा बीरबल से बहुत ज्यादा खुश थे क्योंकि उन्होंने कभी भी राजा बीरबल जैसा बुद्धिमान इंसान नहीं देखा , एक बार की बात है जब बादशाह अकबर अपनी एक खास दोस्त को याद कर रहे थे वह थे पर्शिया के शहंशाह ,

बादशाह अकबर कुछ महीनों से पार्ष्या के बादशाह की ओर से किसी प्रकार का संदेशा ना आने की वजह से बादशाह अकबर को लगा हो सकता है पर्शिया के शहंशाह  हमारे ऊपर नाराज हो अथवा बादशाह किसी मुसीबत में फंस गए होंगे इस तरह की बातें सुनकर बीरबल ने बादशाह अकबर को दिलासा दिया  और कहा कि

“हो सकता है इस बार पर्शिया के शहंशाह आपको कुछ खास तोहफा देने वाले हैं इसी वजह से कुछ महीने आपसे बिना बात किए कुछ तो फिर को तैयार कर रहे होंगे”

जिससे आप जब उस तोहफे को देखेंगे आप खुश हो जाएंगे इसीलिए वे आपसे बात नहीं कर रहे होंगे राजा बीरबल ने बादशाह अकबर को यह  कह के उत्साहित किया

“हो सकता है आपके लिए भेजा गया तोहफा बहुत ही कीमती और विशेष है इसलिए उसकी गठन में और बनाने में पार्शिया के राजा खुद लगे हुए होंगे इसी वजह से वे बहुत ही व्यस्त हैं”

“और दूसरी बात जिस तरह बादशाह अकबर आप अपने  राज्य के कामों में व्यस्त रहते हैं उसी तरह हो सकता है पार्ष्या के बादशाह भी अपने राज्य के सभी प्रकार के कामों में व्यस्त हैं इसलिए वह समय निकालकर आप को खत भी नहीं लिख पा रहे होंगे “

सोने का शेर भाग - 2

कुछ दिन व्यतीत होने के बाद बादशाह अकबर अपने सभासदों के साथ राज्यसभा में बैठकर एक महत्वपूर्ण घटना पर चर्चा कर रहे थे तभी पर्शिया के बादशाह ने बादशाह जलालुद्दीन अकबर के  लिए  राजदूत को माध्यम बनाते हुए उन्होंने एक खास तोहफा राजदरबार में पेश करवाया

पर्शिया के राजदूत द्वारा लाए गए एक विशाल  तोहफे को देखकर सभासदों में खलबली मच गई और सभी सोचने लग गए कि ऐसा क्या हो सकता है जिससे भेजने में पर्शिया के शहंशाह को इतना वक्त लग गया

 बादशाह अकबर और पर्शिया के शहंशाह के बीच बुद्धिमता को लेकर हमेशा  दोनों राज्यों में बुद्धि का युद्ध होता है जिसमें बीरबल हमेशा बादशाह अकबर की सम्मान को बचा कर रखते हैं और कभी भी बादशाह अकबर को नीचा नहीं होने देते हैं 

पर्शिया  के शहंशाह राजा बीरबल से बहुत ही ज्यादा प्रभावित है क्योंकि वे राजा बीरबल के बुद्धिमता  की परीक्षा लेने के लिए कठिन से कठिन चुनौतियों को बादशाह अकबर के दरबार में भेजते रहते हैं और राजा बीरबल की वजह से बादशाह अकबर और पर्शिया के शहंशाह के बीच काफी गहरी दोस्ती हो गई है

सोने का शेर भाग - 3

पर्शिया  के शहंशाह ने राजा  बीरबल को माध्यम बनाकर बादशाह अकबर के सामने एक ऐसा उपहार रखा जो एक चुनौती का रूप धारण करके सभासदों के सामने प्रकट हुआ राजदूत का कहना है इस बाहर का पर्दा हटाने से पहले पर्शिया  के शहंशाह  का एक पैगाम बादशाह अकबर आप सुन  ले

 ”हमारे मित्र जलालुद्दीन अकबर हमने तोहफा की शक्ल में आपको एक चुनौती भेंट की है हम यह चाहते हैं कि आप अपने दिक्कत और बुद्धिमान सलाहकारों में से किसी एक को चुनें और उनकी मदद से आप इस चुनौती का हल निकाले यह एक बुद्धि की चुनौती है जिसमें हम आशा करते हैं कि आप सफल हो पाएंगे ”

 बादशाह अकबर ने राजदूत को तोहफा का पर्दा हटाने के लिए कहा  तोहफा जिस पर्दे में लिपटा हुआ था उस पर्दे को हटाने के बाद  सभा के सभी सदस्य चिंता में पड़ गए क्योंकि उस

क्योंकि पर्शिया  के शहंशाह ने तोहफे में एक  सोने का शेर बादशाह जलालुद्दीन अकबर को भेंट में दिया था और पर्शिया  के शहंशाह  का यह चुनौती था कि इस  सोने के शेर को बिना छुए पिंजरे से बाहर निकालना है

और अगर इस परीक्षा में आपके सभा का कोई भी एक सदस्य सफल होता है तो उसे हम हमारा एक राज्य भेंट में दे देंगे और अगर आप के राज्य के सदस्यों में अगर कोई भी इस चुनौती में सफल नहीं हो पाता है तो बादशाह जलालुद्दीन अकबर आपको अपना एक राज्य में पेट में देना होगा

 बादशाह जलालुद्दीन ने चुनौती स्वीकार करते हुए राजदूत से कहा कि  हम आपके शहंशाह के द्वारा दिए चुनौती को शिकार करते हैं और हम कुछ ही क्षणों में आपके इस चुनौती को विफल करके आपके सामने प्रस्तुत करेंगे’’

 बादशाह अकबर पूरे  राज्यसभा में राजा बीरबल के ऊपर सबसे ज्यादा निर्भर थे और उन्हीं को सबसे ज्यादा विश्वसनीय तथा बुद्धिमान मानते थे इसलिए बादशाह अकबर ने सर्वप्रथम राजा बीरबल के पास इस चुनौती का उत्तर मिलने की आशा में राजा बीरबल को हल करने के लिए कहा

 राजा बीरबल कभी भी अपने परम मित्र बादशाह अकबर को किसी के सामने नीचा नहीं होने  दे सकते हैं इसलिए उन्होंने इस चुनौती को स्वीकार करते हुए कहा बादशाह अकबर आपको आपकी इस चुनौती का हाल में कुछ दिनों में दे सकता हूं आप निश्चिंत होकर अपने सिंहासन में बैठ जाइए

सोने का शेर भाग - 4

राजा बीरबल ने सर्वप्रथम जिला में कैद  सोने के शेर को चारों ओर से देखने लगे उन्होंने देखा कि पिंजरे में कैद हुए खीर की कुछ विशेष खासियत है जिसकी कोई भी एक रोशनी पिंजरे में बंद बंद शेर के ऊपर पड़ती है

तो शेर के शरीर में एक अलग ही प्रकार की गर्मी आ जाती है बीरबल ने उस सोने की शेर को छू कर देखा कि उस शेर के शरीर में ऐसा किया था तो इस्तेमाल किया गया है जिसकी वजह से सूर्य की रोशनी  पढ़ते ही बहुत ही ज्यादा गर्म हो जाती है

 कुछ देर बाद जब राजा बीरबल ने देखा पर्शिया  के शहंशाह के द्वारा भेजा गया  सोने का शेर जिस तत्व का बना है उसमें सोनी का तत्व मौजूद है ही नहीं और इस बात की पुष्टि करने के लिए –

राजा बीरबल ने एक परीक्षा करने का तय किया जिसमें राजा बीरबल ने अपने सभा में मौजूद सैनिकों से एक लोहे की छड़ को बहुत ही ज्यादा गर्म  करने के लिए कहा लोहे का छड़ इतना गर्म होना चाहिए  दिखने में ऐसा लगे कि एक अंगार के टुकड़े को लाया जा रहा हूं

 बीरबल के कहे मुताबिक सैनिकों ने लोहे के  छड़ को इतना गर्म किया जैसे कि लोहे का छड़ पिघलने वाला हो और उसमें से दुआ निकल रहा था और सैनिकों ने उस लोहे की छड़ को लाकर बीरबल को सौंप दिया

 राजा बीरबल ने अपनी  बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए उस लोहे की छड़ को पिंजरे में बंद सोने के शेर  के बीच में रख दिया और  सभा के सदस्यों  तथा पर्शिया  के शहंशाह  द्वारा भेजे राजदूत को पिंजरे के अंदर ध्यान से देखने के लिए कहा

सोने का शेर भाग - 5

सभा में मौजूद सभी सभासद और राजदूत बहुत ही ध्यान पूर्वक उस शेर को देखने लगे जिसके पीठ पर राजा बीरबल ने लोहे की छड़ को रखा था कुछ देर  बाद ज्यादा गर्मी की वजह से जो शेर सोनी का रंग चढ़ा कर शहंशाह ने भेजा था उसका रंग उतरने लगा

और धीरे-धीरे कुछ समय और बीतता गया और उसी के साथ शेर के ऊपर लगा सोने का रंग पूरी तरह से पिघल के निकल गया लोहे की छड़ के ज्यादा गर्म हो जाने की वजह से शेर  का शरीर पिघलने लगा

तब कुछ देर बाद सभा के सभी सदस्यों को यह बात पता चली कीजिए फिर जो पिंजरे के अंदर है वह असल में सोने का शेर है ही नहीं इस शेर को पर्शिया  के शहंशाह ने कुछ  ऐसी चालाकी से बनाया जिससे लगे कि – 

यह एक सोने का शेर है लेकिन असल में यह एक मोम का पुतला था जिसे शेर का रूप दिया गया और इसके ऊपर सोने का पानी चढ़ा दिया गया जिससे लगे कि यह पिंजरे में जो शेर है वह एक सोने का शेर  है

और इसी बात का फायदा उठाते हुए पर्शिया  के शहंशाह ने बादशाह अकबर के सामने इस चुनौती को रखा कि बिना किसी प्रकार की बल का इस्तेमाल करते हुए और पिंजरा को तोड़े बिना पिंजरा के अंदर जो सोने का शेर है उसे बाहर निकाला जाए और इस चुनौती को पूरा करने के लिए पर्शिया  के शहंशाह ने बादशाह अकबर को कहा

 कुछ देर बाद जब लोहे का छड़ पूरी तरह से अपना काम करने लगा तब बहुत ही तेजी से  शेर का रूप लिया हुआ मोम का पुतला निकल के लोहे के पिंजरे के अंदर समा गया

और  शेर का रूप देने में  मोम के पुतले में बहुत ज्यादा  मात्रा में मोम  का इस्तेमाल हुआ था इसी वजह से निकलने के बाद धीरे धीरे से सभी मोम का तरल पदार्थ पिंजड़े के बाहर निकलने लगा

आखिर में राजा बीरबल ने  किसी प्रकार की बल का इस्तेमाल ना करते हुए और अपने बुद्धि का इस्तेमाल करते हुए बिना छुए शेर को पिंजरे से बाहर निकाल दिया

सोने का शेर भाग - 6

बादशाह अकबर बीरबल द्वारा इस कठिन पहेली को सुलझाने की खुशी में पूरे राज्य में लड्डू बटवा ए और राजा बीरबल को बुद्धिमता का प्रतीक घोषित किया इसी के साथ सभी सभासदों ने राजा बीरबल की कारनामे को देखकर उन्हें अभिनंदन दिया

और कहा कि ”आपके जैसा महापुरुषों दूसरा इस दुनिया में ना कोई आया है और ना कोई आएगा क्योंकि आप बुद्धिमता और चालाकी की वह मिसाल हो जो किसी इंसान में होना आश्चर्य की बात है”

”आपकी चालाकी की वजह से आज बादशाह अकबर अपने राज्य के सम्मान और  नाम को दुनिया के हर कोने में भेजने  में सक्षम हो पाए है”

 बादशाह अकबर ने पर्शिया  के शहंशाह द्वारा भेजी है उस पिंजरे को राजदूत  के द्वारा फिर से अपने राज्य में ले जाने के लिए कहा इसी के साथ राजदूत  के हाथों पर्शिया  के शहंशाह  के लिए एक संदेश भेजा

जिसमें बादशाह अकबर ने राजा बीरबल के द्वारा कैसे मोम के पुतले को सभा के सभी सदस्यों के सामने उजागर किया और  प्रमाण किया कि कैसे बिना हाथ लगाए हम पिंजरे से उस शेर को निकालने में सफल रहे

पर्शिया  के शहंशाह  ने बादशाह का पैगाम पढ़कर बहुत खुश हुए वे राजा बीरबल की इसी बुद्धिमता और चालाकी दिमाग की एक नमूने को देखने के लिए ही इस प्रकार की  बुद्धि की चुनौती को  बादशाह अकबर के महल में भेजा था

पर्शिया  के शहंशाह  ने खुश होकर राजा बीरबल को अपने देश का दो राज्य  और एक हजार हाथी उपहार स्वरूप प्रदान की है और कहां आपके जैसे शाही सलाहकार अपने राज्य में होना बहुत ही गर्व की बात है

राजा अकबर बहुत ही भाग्यशाली है जिन्हें आप के जैसा एक बुद्धिमान सलाहकार परम मित्र  मिला जिसकी बदौलत बादशाह अकबर आज अपने सल्तनत  की ख्याति और नाम तथा सम्मान को दुनिया के हर एक कोने में पहुंचाने में सक्षम हुए हैं

मोरल ऑफ द स्टोरी

”कोई भी चुनौती बड़ी नहीं होती और कोई भी चुनौती  छोटी नहीं होती इंसान की सोचने की शक्ति और समझने की शक्ति उस से छोटी या बड़ी बनाती है”

”इंसान जितना बुद्धिमान होता है उसके लिए चुनौतियां भी इतनी ज्यादा छोटी हो जाती है और इंसान इतना ज्यादा कम बुद्धिमान होता है उसके लिए हर एक चुनौती उतनी ही ज्यादा बड़ी हो जाती है”

”संसार में अगर आपको सर उठाकर बिना डरे जीना है तो आपको बुद्धिमान होना होगा क्योंकि बुद्धि  ऐसा एक अस्त्र है जो आपके बुरे समय मे आपके बहुत काम आएगी”

”आपको जीवन के हर एक परीक्षा में सफलता दिलाने में आपके लिए बीरबल के जैसा काम करेगी जिस तरह राजा बीरबल बादशाह अकबर के लिए करते हैं  थे”

 

 

 

3 thoughts on “अकबर बीरबल की कहानियां न्यू”

Leave a Comment