अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियाँ

अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियाँ – अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियाँ – इस कहानी के माध्यम से हम अकबर और बीरबल में हुई दोस्ती की एक गहरी शुरुआत के बारे में बात करने जा रहे हैं इस कहानी में हम देखेंगे कि कैसे महेश दास जो एक साधारण सा इंसान था जिसने  बुद्धि और सबसे अलग सोचने की क्षमता से बादशाह अकबर के दिल में एक पहचान बनाई ,

और बादशाह अकबर के राज्य में सबसे ज्यादा बुद्धिमान व्यक्ति का नाम उपलब्ध करने में सफल हुआ ,बादशाह अकबर के  बीरबल  के साथ साक्षात होने से पहले उनके राज दरबार में कुल 8  रत्न थे जो अपनी बुद्धि और कौशल की वजह से बादशाह अकबर के राज दरबार  की शान बनकर खड़े हुए थे इन्हें पूरे दुनिया में बुद्धि   के 8 महारथी के रूप में देखा जाता था

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अकबर और बीरबल की मजेदार कहानियाँ

ज्ञान की परीक्षा भाग 1

एक बार की बात है जब शहंशाह अकबर  अपने एक मित्र को जन्मदिन की बधाई देने के लिए आगरा के लिए निकले थे , बादशाह के मित्र का घर आगरा में स्थित है 

और बादशाह के राज्य से आगरा तक का सफर बहुत ही ज्यादा लंबा होने के  का दो मंत्री जिन्होंने  बादशाह अकबर के साथ गए थे दोनों ने सुझाव दिया कि वे जंगल के रास्ते से आगरा के लिए निकलते हैं तो बहुत ही जल्द हम सभी हमारे लक्ष्य तक पहुंच जाएंगे

बादशाह अकबर ने अपने मंत्रियों के सुझाव के ऊपर सम्मति दिया और कहा कि जंगल का हर एक को ना अगर आप दोनों को मालूम है तभी हम इस रास्ते से चलना मुनासिब समझेंगे

 दोनों मंत्रियों ने अपने अपने उत्तर में कहा कि हमें इस जंगल में एक इलाके में हमारे  सेना की टुकड़ियों आती-जाती रहती है तो हमें उन सेना से जो ज्ञान प्राप्त हुआ है  एक नक्शा हमारे पास से जिसको हम देख के आगे बढ़ सकते हैं और क्या पता हम  इस नक्शे को देखकर आगे बढ़ते रहेंगे तो बहुत ही जल्द हम आगरा तक पहुंच जाएंगे

मंत्रियों ने जैसा सोचा था जंगल के बारे में जंगल में सब बिल्कुल नहीं था जंगल में बहुत सारी  मुसीबतों को बादशाह अकबर और मंत्रियों  द्वारा झेलना पड़ा क्योंकि जंगल के हर एक कोने में जंगली जानवर तथा बहुत  ही खतरनाक पेड़ थे जिनकी  डालियों में अगर एक बार घोड़े का पेड़ अटक जाए तो निकलना बहुत ही मुश्किल है

 इन सभी प्रकार के मुश्किलों का सामना करते हुए बादशाह अकबर और उनके मंत्री तथा सेना आगे बढ़ रही थी लेकिन कुछ देर जाने के बाद  मंत्रियों ने आगे जाने का रास्ता ढूंढने में नाकाम हो गए और एक समय ऐसा आया कि वह पूरी तरीके से भटक गए थे

 कुछ देर चलने के बाद  बादशाह अकबर थक गए थे और जाकर एक पेड़  के नीचे बैठ गए , सभी मंत्रियों से कहने लगे कि आप कोई दूसरी तरकीब लगाएं ताकि हम जल्द से जल्द इस जंगल से निकल पाए और  रात होने से पहले आगरा पहुंच कर हमारे मित्र को जन्मदिन की बधाई दे पाए

ज्ञान की परीक्षा भाग 2

बादशाह अकबर ने कुछ देर इंतजार करने के बाद अचानक से उनके सामने से एक 12 साल का छोटा सा बच्चा जाते हुए देखा उन्होंने उस बच्चे को बुलाया और  कहा

 क्या तुम इस जंगल में रहते हो तुम्हारा नाम क्या है और क्या तुम हमें इस जंगल से निकलने का कोई आसान तरीका बता सकते हो हम बादशाह अकबर है मुगल सल्तनत के मालिक

अगर तुम हमें इस जंगल से निकलने का कोई रास्ता बता पाओगे? अगर तुम हमें इस जंगल से निकालने में मदद करते हो तो तुम जब बड़े हो जाओगे तो मैं तुम्हें अपने राज्य में एक खास मंत्री के रूप में तुम्हें स्थान देने का वचन दूंगा

 उस बच्चे ने उत्तर में कहा बादशाह अकबर मेरा नाम महेश दास है मैं इस जंगल में रहने वाला एक तुच्छ बालक हूं जो अपने माता-पिता की सेवा करता है  और ज्ञान की खोज में मैं खुद एक ऋषि के आश्रम में दीक्षा ग्रहण कर रहा हूं

  मेरे आदरणीय गुरु ने मुझे इस जंगल के हर एक हिस्से का सटीक ज्ञान दिया है ताकि मैं आप जैसे कोई भी एक  रास्ते से बिछड़े हुए मुसाफिरों को अपने मंजिल में पहुंचाने में मदद कर

 तभी उत्तर  बादशाह अकबर ने कहा कि अगर तुम सच में बिछड़े हुए मुसाफिरों को उनके  मंजिल तक पहुंचाने में मदद करते हो तो तुम बहुत ही नेक काम कर रहे हो

और हम तुम्हें इस नेक काम के बदले में एक अंगूठी दे रहे हैं  तुम्हें जब भी मेरी मदद की जरूरत हो तब मेरे पास चले आना अगर मैं तुम्हें भूल जाऊं तो मुझे तुम यह  अंगूठी दिखा देना मुझे तुरंत तुम्हारी याद आ जाएगी

 महेश ने शहंशाह अकबर के मंत्रियों को जंगल से निकलने के तीन रास्ते बताएं जिसमें से एक रास्ता नदी होकर जाता है दूसरा रास्ता पहाड़ होकर जाता है और तीसरा रास्ता आगरा की ओर जाता है और शहंशाह अकबर को आगरा की ओर जाना था क्योंकि उन्हें वक्त रहते अपने दोस्त की जन्मदिन  की बधाई उसे देनी थी

 महेश की मदद से शहंशाह अकबर आसानी से जंगल को पार करने में सफल हो पाए और अपने मित्र से मिले और उन्हें जन्मदिन की बधाई  दी और महेश के द्वारा किस  उन्हे  मदद मिली इसके बारे में  अपने दोस्त को बादशाह अकबर ने विस्तार से बताया

ज्ञान की परीक्षा भाग 3

10 साल के बाद महेश एक युवा पुरुष बन चुका था और उसने अपने गुरु के यहां से संपूर्ण तरह ज्ञान प्राप्त  करने में सफल हो गया था क्योंकि महेश बादशाह अकबर के राज्य में रहते थे इसीलिए अपने संपूर्ण ज्ञान को समेट कर बादशाह अकबर के पास जाना सही समझा

 महेश ने जब राज दरबार में जाने के  लिए प्रस्तुत हुआ तब उसने देखा कि बादशाह के के राज्य में हर तरफ बादशाह को लेकर जनता में बहुत ही ज्यादा नाराजगी फैली हुई थी जिसका मुख्य कारण था

बादशाह अकबर अफगान से आए थे और भारत में आकर मुगल सल्तनत की शहंशाह बने और दूसरी वजह थी अपने राज्य में सभी प्रकार के लोगों के  जरूरत को पूरा करने में नाकामयाब होने की वजह से बादशाह अकबर के ऊपर राज्य के लोग कुछ ज्यादा खुश नहीं

महेश ने बादशाह अकबर के इस राज्य को फिर से   खुशहाल बनाने का सोचा और इसी लक्ष्य को पूरा करने के लिए महेश ने शहंशाह अकबर के दरबार में जाने का तय किया

 बादशाह अकबर अपने  राज्यसभा  के बैठक में व्यस्त थे तभी महेश ने जाकर अपनी उपस्थिति  दी और कहा की है शहंशाह मैं आपसे आज से 10 साल पहले एक जंगल में मिला था जहां पर आपने मुझे मेरे ज्ञान के आधार पर इस राज्य में एक विशेष स्थान देने का वचन दिया था

 शहंशाह बूढ़े हो चुके थे और महेश  के चेहरे को देखकर पहचान नहीं पा रहे थे क्योंकि महेश एक  युवक और जिस वजह से उसकी चेहरे का ढांचा भी परिवर्तन हो गया था

जिस वजह से शहंशाह को बस महेश नाम ही याद था और इसी वजह से शहंशाह अकबर ने कहा कि हमें महेश नाम का एक इंसान 10 साल पहले मिला था लेकिन हमने उसे एक खास चीज से नवाजा था

अगर वह हर चीज तुम्हारे पास है या उसका नाम तुम बता सकते हो  तब हम विश्वास करेंगे कि हमने जिस छोटे बच्चे से 10 साल पहले  मिले थे वह तुम ही थे

 बादशाह अकबर की इस बात को  सुनकर महेश ने बादशाह द्वारा उसे दिए सोने की अंगूठी को निकाल कर दिखाया और कहा कि यह है वह  जिसे मैंने 10 साल से संभाल कर अपने पास रखा है

ताकि मैं अपने गुरुदेव से योग्य ज्ञान प्राप्त करके आपके पास आपके राज्य में लौट सकूं और इस राज्य को फिर से एक खुशहाल और प्रभावशाली राज्य बनाने में आपकी थोड़ी बहुत मदद कर सकूं यही मेरे जीवन का लक्ष्य है

ज्ञान की परीक्षा भाग 4

बादशाह अकबर महेश द्वारा कही गई बातों को सुनकर बहुत ही ज्यादा खुश हुए और  महेश ने कहा कि मेरे राज्यसभा में कुल आठ मंत्री हैं और  सभी बहुत ही ज्यादा ज्ञानी है

अगर तुम इन  आठों मंत्रियों को अपने ज्ञान के माध्यम से हरा देते हो तो मैं तुम्हें अपने नवरत्न में शामिल कर लूंगा अभी तुम्हारे गुरुदेव द्वारा तुम्हें प्रदान किए ज्ञान ही निश्चित करेगा कि तुम अकबर के राज्य के महामंत्री बनने के काबिल हो या नहीं

इसके लिए तुम्हें मेरे इन आठों मंत्रियों के हर एक सवाल को बिना गलत किए देना होगा अगर तुम किसी भी सवाल में गलत होते हो तो तुम्हें मंत्री  पद के लिए योग्य व्यक्ति नहीं माना  जाएगा

 महेश ने  अपने उत्तर में कहा बादशाह अकबर में अपने बचपन से आप के दरबार में एक मंत्री पद  का सम्मान और इस राज्य  को प्रभावशाली बनाने का सपना देख कर अपने गुरुदेव से हमेशा बात करता रहता था

और मेरे गुरुदेव ने मुझे इस आशीर्वाद के साथ यहां पर भेजा है ताकि मैं आपके इस सपने को पूरा करने में सफल हो पाऊं और यही मेरी जिंदगी का  लक्ष्य है

 शहंशाह के दरबार में बैठे आठों मंत्रियों ने एक-एक करके सभी  ने अपने प्रश्न उसे पूछने लगे और महेश बिना किसी डर और चिंता के हर एक सवालों के उत्तर बहुत ही आसानी से

और सही तरीके से देने लगा जिसमें से कुछ सवाल ऐसे भी थे जिन्हें हल करना किसी साधारण इंसान के लिए बिल्कुल आसान नहीं था लेकिन महेश अपने गुरुदेव से ग्रहण किए विद्या की मदद से शहंशाह अकबर के दरबार में पूछे गए  सभी सवालों के सही जवाब देने में सक्षम रहे

ज्ञान की परीक्षा भाग 5

 शहंशाह के सभी मंत्रियों  के द्वारा सभी प्रकार के सवाल को हल करने के बाद बादशाह अकबर ने खुद महेश को एक सवाल पूछना चाह जो था किसी  ऐसे दो पड़ोसियों के नाम  बताओ जो कभी भी एक दूसरे को देख नहीं सकते?

उत्तर में महेश ने कहा कि वह दो पड़ोसी आपके साथ ही हमेशा चलते हैं जो कभी भी एक दूसरे को नहीं देख सकते  जो है आपकी बाई आंख और डाई आंख क्योंकि दोनों ही आपको हर एक चीज देखने में मदद करती है लेकिन दोनों एक दूसरे को कभी भी नहीं

 महेश के इस उत्तर को सुनकर शहंशाह बहुत ही ज्यादा खुश हुए और महेश को हर एक  विषय में  श्रेष्ठ व्यक्ति के रूप में ग्रहण किया और इसी के साथ शहंशाह अकबर ने महेश को अपने राज्य का एक ज्ञानी पुरुष तथा महामंत्री के रूप में स्वीकृति दिया

और इसी के साथ महेश को कहा कि आज से तुम्हें हम राजा बीरबल के रूप में पुकारेंगे और इसी नाम से तुम हमारे राज्य में सभी  के मुख से परिचित होगे यह तुम्हारा नया परिचय पत्र है

जो  हम तुम्हें देने जा रहे हैं हम आशा करते हैं कि तुम हमारे इस विश्वास को कभी भी नहीं तोड़ोगे और हमारे इस राज्य को  प्रभावशाली और खुशहाल बनाने में हमारी मदद करोगे

ज्ञान की परीक्षा भाग 6

राजा बीरबल संपूर्ण तरीके से बादशाह अकबर के हर एक आशा पर खरे उतरे और राज्य को बहुत ही  ज्यादा सम्मान और प्रभावशाली बनाने में सक्षम रहें राजा बीरबल ने कुछ ही सालों के अंदर मुग़ल सल्तनत को एक अलग ही मुकाम पर पहुंचा दिया था 

 मुगल सल्तनत की हर एक पड़ोसी  राजीव बादशाह अकबर से बहुत ही ज्यादा खुश थे और इसी के साथ उनके दुश्मन भी शहंशाह से टक्कर लेने से पहले सौ बार सोचते थे कि उनके पास बीरबल नाम कार्य कैसा शस्त्र था जिसकी मूर्ति के सामने हर एक  शक्तिशाली इंसान घुटने टेक देता था राजा  बीरबल के सामने हर एक बुद्धिमान व्यक्ति हार मानता था क्योंकि बुद्धि  के मामले में राजा बीरबल जैसा दूसरा पूरे राज्य में कोई नहीं था

राजा  बीरबल को अपने गुरुदेव से मिले हर प्रकार के  ज्ञान की वजह से समाज में उन्हें बहुत ही ज्यादा सम्मान मिला और इसी के साथ पूरे भारतवर्ष के सभी राजाओं ने उनकी बुद्धि की  प्रशंसा करते हुए कहा कि मुगल सम्राट बादशाह अकबर बहुत ही खुशनसीब है जिन्हें राजा बीरबल जैसे एक ऐसे बुद्धिमान व्यक्ति महामंत्री के रूप में प्राप्त हुआ

Moral Of the Story

इस संसार में अगर सबसे ज्यादा  शक्ति किसी चीज में है तो वह है एक इंसान का ज्ञान जो बड़े से बड़े  दानव जैसे दिखने वाले  दुविधा को भी मार के गिराने  की क्षमता रखता है

अगर कोई इंसान  के पास ज्ञान का अस्त्र है तो उसे संसार की किसी स्त्री की जरूरत नहीं है क्योंकि ऐसा अस्त्र सभी के पास नहीं होता और जिसके पास होता है वह संसार में राज करता है

इसीलिए हमेशा हमें अपने ज्ञान को पृथक करने के बारे में सोचना चाहिए ना ही कि किसी दूसरों के बुरे होने के बारे में  सोचना चाहिएजिस तरह राजा बीरबल अपने लक्ष्य को पाने के लिए

अपने संपूर्ण जीवन को गुरु के चरणों में समर्पित कर दिया उनके ज्ञान के भंडार को प्राप्त करने के लिए उसी तरह ज्ञान  को प्राप्त करने की कोई सीमा नहीं होती

ज्ञान एक ऐसा समंदर है जिसे हम जितना भी पी ले वह खत्म नहीं होता पानी की तरह बेटा ही रहता है इसीलिए अपने आपको अगर संसार में सबसे उच्च स्थान पर लेकर जाना है तो ज्ञान ही एकमात्र ऐसा जरिया है जिससे आप रास्ता बना कर उस मुकाम तक पहुंच सकते हैं

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